Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 4 / Sukta 17 / Mantra 16

58 Sukta
21 Mantra
4/17/16
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ग॒व्यन्त॒ इन्द्रं॑ स॒ख्याय॒ विप्रा॑ अश्वा॒यन्तो॒ वृष॑णं वा॒जय॑न्तः। ज॒नी॒यन्तो॑ जनि॒दामक्षि॑तोति॒मा च्या॑वयामोऽव॒ते न कोश॑म् ॥१६॥

ग॒व्यन्तः॑ । इन्द्र॑म् । स॒ख्याय॑ । विप्राः॑ । अ॒श्व॒ऽयन्तः । वृष॑णम् । वा॒जय॑न्तः । ज॒नि॒ऽयन्तः॑ । ज॒नि॒ऽदाम् । अक्षि॑तऽऊतिम् । आ । च्य॒व॒या॒मः॒ । अ॒व॒ते । न कोश॑म् ॥

Mantra without Swara
गव्यन्त इन्द्रं सख्याय विप्रा अश्वायन्तो वृषणं वाजयन्तः। जनीयन्तो जनिदामक्षितोतिमा च्यावयामोऽवते न कोशम् ॥

गव्यन्तः। इन्द्रम्। सख्याय। विप्राः। अश्वऽयन्तः। वृषणम्। वाजयन्तः। जनिऽयन्तः। जनिऽदाम्। अक्षितऽऊतिम्। आ। च्यवयामः। अवते। न। कोशम् ॥१६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 24 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (गव्यन्तः) अपनी गौओं की इच्छा (अश्वायन्तः) अपने घोड़ों की इच्छा (वाजयन्तः) विज्ञान वा अन्न की इच्छा (जनीयन्तः) तथा स्त्री की इच्छा करते हुए (विप्राः) बुद्धिमान् हम लोग (सख्याय) मित्र होने के वा मित्रकर्म के लिये (वृषणम्) सुख के वर्षानेवाले पिता (जनिदाम्) जन्म देनेवाली माता (अक्षितोतिम्) वा जिसकी रक्षा क्षीण नहीं होती, उस नित्यरक्षक पुरुष को और (अवते) कूप में (कोशम्) मेघ के (न) सदृश (इन्द्रम्) वा सूर्य्य के सदृश प्रकाशमान राजा को (आ, च्यावयामः) प्राप्त करावें, वैसे इस सब को आप लोग भी औरों को प्राप्त कराओ ॥१६॥
Essence
इस मन्त्र में उपमावाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। जिनको सुख और ऐश्वर्य्य की इच्छा होवे, वे मेघ के सदृश धन वर्षाने और नित्य रक्षा करनेवाले राजा को मित्रभाव के लिये ग्रहण करें ॥१६॥
Subject
अब प्रजाजनों को कैसे सुख और ऐश्वर्य हो, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.