Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 6 / Mantra 1

62 Sukta
11 Mantra
3/6/1
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
प्र का॑रवो मन॒ना व॒च्यमा॑ना देव॒द्रीचीं॑ नयत देव॒यन्तः॑। द॒क्षि॒णा॒वाड्वा॒जिनी॒ प्राच्ये॑ति ह॒विर्भर॑न्त्य॒ग्नये॑ घृ॒ताची॑॥

प्र । का॒र॒वः॒ । म॒न॒ना । व॒च्यमा॑नाः । दे॒व॒द्रीची॑न् । न॒य॒त॒ । दे॒व॒ऽयन्तः॑ । द॒क्षि॒णा॒ऽवाट् । वा॒जिनी॑ । प्राची॑ । ए॒ति॒ । ह॒विः । भर॑न्ती । अ॒ग्नये॑ । घृ॒ताची॑ ॥

Mantra without Swara
प्र कारवो मनना वच्यमाना देवद्रीचीं नयत देवयन्तः। दक्षिणावाड्वाजिनी प्राच्येति हविर्भरन्त्यग्नये घृताची॥

प्र। कारवः। मनना। वच्यमानाः। देवद्रीचीम्। नयत। देवऽयन्तः। दक्षिणाऽवाट्। वाजिनी। प्राची। एति। हविः। भरन्ती। अग्नये। घृताची॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 26 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(देवद्रीचीम्) जिससे मनुष्य विद्वानों का सत्कार करता है उसकी तथा (देवयन्तः) विद्वानों की कामना करनेवाले हे (कारवः) शिल्प कामों के कर्ता विद्वानो ! तुम जो (मनना) मानने वा जानने योग्य (वच्यमानाः) वा जो कही जाती वा (दक्षिणावाट्) जो दक्षिण दिशा को प्राप्त होती हुई (वाजिनी) जो प्राप्त होनेवाली वा (प्राची) जो पहिले प्राप्त होती पूर्व दिशा वा (घृताची) जो जल को प्राप्त होती हुई (अग्नये) अग्नि के लिये (हविः) देने योग्य पदार्थ को (भरन्ती) धारण करती वा पुष्ट करती हुई (एति) प्राप्त होती है उन सबको (प्र, णयत) प्राप्त करो ॥१॥
Essence
जैसे विद्वान् लोग रात्रि और रात्रि के व्यवहारों को जानते हैं, वैसे औरों को भी जानना चाहिये ॥१॥
Subject
अब ग्यारह ऋचावाले छठे सूक्त का प्रारम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में अग्नि के सम्बन्ध से विद्वानों के गुणों को कहते हैं।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.