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Rigveda Mandal 3 / Sukta 31 / Mantra 9

62 Sukta
22 Mantra
3/31/9
Devata- इन्द्र: Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः, ऐषीरथीः कुशिको वा Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नि ग॑व्य॒ता मन॑सा सेदुर॒र्कैः कृ॑ण्वा॒नासो॑ अमृत॒त्वाय॑ गा॒तुम्। इ॒दं चि॒न्नु सद॑नं॒ भूर्ये॑षां॒ येन॒ मासाँ॒ असि॑षासन्नृ॒तेन॑॥

नि । ग॒व्य॒ता । मन॑सा । से॒दुः॒ । अ॒र्कैः । कृ॒ण्वा॒नासः॑ । अ॒मृ॒त॒ऽत्वाय॑ । गा॒तुम् । इ॒दम् । चि॒त् । नु । सद॑नम् । भूरि॑ । ए॒षा॒म् । येन॑ । मासा॑न् । असि॑सासन् । ऋ॒तेन॑ ॥

Mantra without Swara
नि गव्यता मनसा सेदुरर्कैः कृण्वानासो अमृतत्वाय गातुम्। इदं चिन्नु सदनं भूर्येषां येन मासाँ असिषासन्नृतेन॥

नि। गव्यता। मनसा। सेदुः। अर्कैः। कृण्वानासः। अमृतऽत्वाय। गातुम्। इदम्। चित्। नु। सदनम्। भूरि। एषाम्। येन। मासान्। असिसासन्। ऋतेन॥

Ashtak » 3 Adhyay » 2 Varga » 6 Mantra » 4

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Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (कृण्वानासः) करते हुए जन (गव्यता) अपनी वाणी के सदृश (मनसा) अन्तःकरण से (अर्कैः) सत्कार करने योग्य विद्वानों के साथ (अमृतत्वाय) मोक्ष के होने के लिये (गातुम्) प्रशंसायुक्त भूमि को (नि, सेदुः) प्राप्त होवें तथा (इदम्) इस (चित्) भी (भूरि) बहुत (सदनम्) प्राप्त होने योग्य स्थान को प्राप्त होवें (येन) जिस (ऋतेन) सत्य आचरण से (मासान्) चैत्र आदि महीनों के (असिषासन्) विभाग करने की इच्छा करें, उससे (एषाम्) इन पुरुषों का कल्याण (नु) शीघ्र होता है ॥९॥
Essence
जो मनुष्य लोग मोक्ष की इच्छा करें, तो विद्वानों का सङ्ग धर्म का अनुष्ठान और अधर्म का त्याग करके शीघ्र ही अन्तःकरण और आत्मा की शुद्धि करें ॥९॥
Subject
अब मोक्ष की इच्छा करनेवालों को क्या करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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