Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 9 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/9/7
Devata- इन्द्र: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सं गोम॑दिन्द्र॒ वाज॑वद॒स्मे पृ॒थु श्रवो॑ बृ॒हत्। वि॒श्वायु॑र्धे॒ह्यक्षि॑तम्॥

सम् । गोऽम॑त् । इ॒न्द्र॒ । वाज॑ऽवत् । अ॒स्मे इति॑ । पृ॒थु । श्रवः॑ । बृ॒हत् । वि॒श्वऽआ॑युः । धे॒हि॒ । अक्षि॑तम् ॥

Mantra without Swara
सं गोमदिन्द्र वाजवदस्मे पृथु श्रवो बृहत्। विश्वायुर्धेह्यक्षितम्॥

सम्। गोऽमत्। इन्द्र। वाजऽवत्। अस्मे इति। पृथु। श्रवः। बृहत्। विश्वऽआयुः। धेहि। अक्षितम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 18 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) अनन्त विद्यायुक्त सब को धारण करनेहारे ईश्वर ! आप (अस्मे) हमारे लिये (गोमत्) जो धन श्रेष्ठ वाणी और अच्छे-अच्छे उत्तम पुरुषों को प्राप्त कराने (वाजवत्) नाना प्रकार के अन्न आदि पदार्थों को प्राप्त कराने वा (विश्वायुः) पूर्ण सौ वर्ष वा अधिक आयु को बढ़ाने (पृथु) अति विस्तृत (बृहत्) अनेक शुभगुणों से प्रसिद्ध अत्यन्त बड़ा (अक्षितम्) प्रतिदिन बढ़नेवाला (श्रवः) जिसमें अनेक प्रकार की विद्या वा सुवर्ण आदि धन सुनने में आता है, उस धन को (संधेहि) अच्छे प्रकार नित्य के लिये दीजिये॥७॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि ब्रह्मचर्य्य का धारण, विषयों की लम्पटता का त्याग, भोजन आदि व्यवहारों के श्रेष्ठ नियमों से विद्या और चक्रवर्त्ति राज्य की लक्ष्मी को सिद्ध करके सम्पूर्ण आयु भोगने के लिये पूर्वोक्त धन के जोड़ने की इच्छा अपने पुरुषार्थ द्वारा करें, कि जिससे इस संसार का वा परमार्थ का दृढ़ और विशाल अर्थात् अतिश्रेष्ठ सुख सदैव बना रहे, परन्तु यह उक्त सुख केवल ईश्वर की प्रार्थना से ही नहीं मिल सकता, किन्तु उसकी प्राप्ति के लिये पूर्ण पुरुषार्थ भी करना अवश्य उचित है॥७॥
Subject
फिर भी उक्त धन कैसा है, इस विषय को अगले मन्त्र में प्रकाश किया है-

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.