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Rigveda Mandal 1 / Sukta 84 / Mantra 18

191 Sukta
20 Mantra
1/84/18
Devata- इन्द्र: Rishi- गोतमो राहूगणः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
को अ॒ग्निमी॑ट्टे ह॒विषा॑ घृ॒तेन॑ स्रु॒चा य॑जाता ऋ॒तुभि॑र्ध्रु॒वेभिः॑। कस्मै॑ दे॒वा आ व॑हाना॒शु होम॒ को मं॑सते वी॒तिहो॑त्रः सुदे॒वः ॥

कः । अ॒ग्निम् । ई॒ट्टे॒ । ह॒विषा॑ । घृ॒तेन॑ । स्रु॒चा । य॒जा॒तै॒ । ऋ॒तुऽभिः॑ । ध्रु॒वेभिः॑ । कस्मै॑ । दे॒वाः । आ । व॒हा॒न् । आ॒शु । होम॑ । कः । मं॒स॒ते॒ । वी॒तिऽहो॑त्रः । सु॒ऽदे॒वः ॥

Mantra without Swara
को अग्निमीट्टे हविषा घृतेन स्रुचा यजाता ऋतुभिर्ध्रुवेभिः। कस्मै देवा आ वहानाशु होम को मंसते वीतिहोत्रः सुदेवः ॥

कः। अग्निम्। ईट्टे। हविषा। घृतेन। स्रुचा। यजातै। ऋतुऽभिः। ध्रुवेभिः। कस्मै। देवाः। आ। वहान्। आशु। होम। कः। मंसते। वीतिऽहोत्रः। सुऽदेवः ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 6 Varga » 8 Mantra » 3

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Meaning
हे विद्वान् ! (कः) कौन (वीतिहोत्रः) विज्ञान और श्रेष्ठ क्रियायुक्त पुरुष (हविषाः) विचार और (घृतेन) घी से (अग्निम्) अग्नि को (ईट्टे) ऐश्वर्य प्राप्ति का हेतु करता है, (कः) कौन (स्रुचा) कर्म से (ध्रुवेभिः) निश्चल (ऋतुभिः) वसन्तादि ऋतुओं में (यजातै) ज्ञान और क्रियायज्ञ को करे, (देवाः) विद्वान् लोग (कस्मै) किसके लिये (होम) ग्रहण वा दान को (आशु) शीघ्र (आवहान्) प्राप्त करावें, कौन (सुदेवः) उत्तम विद्वान् इस सबको (मंसते) जानता है, इस का उत्तर कहिये ॥ १८ ॥
Essence
हे विद्वन् ! किस साधन वा कर्म से अग्निविद्या को प्राप्त हों? और किससे क्रियारूप यज्ञ सिद्ध होवे? किस प्रयोजन के लिये विद्वान् लोग यज्ञ का विस्तार करते हैं? ॥ १८ ॥
Subject
फिर भी उक्त विषय का उपदेश किया है ॥

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