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Rigveda Mandal 1 / Sukta 4 / Mantra 9

191 Sukta
10 Mantra
1/4/9
Devata- इन्द्र: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तं त्वा॒ वाजे॑षु वा॒जिनं॑ वा॒जया॑मः शतक्रतो। धना॑नामिन्द्र सा॒तये॑॥

तम् । त्वा॒ । वाजे॑षु । वा॒जिन॑म् । वा॒जया॑मः । श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो । धना॑नाम् । इ॒न्द्र॒ । सा॒तये॑ ॥

Mantra without Swara
तं त्वा वाजेषु वाजिनं वाजयामः शतक्रतो। धनानामिन्द्र सातये॥

तम्। त्वा। वाजेषु। वाजिनम्। वाजयामः। शतक्रतो इति शतऽक्रतो। धनानाम्। इन्द्र। सातये॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 8 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
हे (शतक्रतो) असंख्यात वस्तुओं में विज्ञान रखनेवाले (इन्द्र) परम ऐश्वर्य्यवान् जगदीश्वर ! हम लोग (धनानाम्) पूर्ण विद्या और राज्य को सिद्ध करनेवाले पदार्थों का (सातये) सुखभोग वा अच्छे प्रकार सेवन करने के लिये (वाजेषु) युद्धादि व्यवहारों में (वाजिनम्) विजय करानेवाले और (तम्) उक्त गुणयुक्त (त्वा) आपको ही (वाजयामः) नित्य प्रति जानने और जनाने का प्रयत्न करते हैं॥९॥
Essence
जो मनुष्य दुष्टों को युद्ध से निर्बल करता तथा जितेन्द्रिय वा विद्वान् होकर जगदीश्वर की आज्ञा का पालन करता है, वही उत्तम धन वा युद्ध में विजय को अर्थात् सब शत्रुओं को जीतनेवाला होता है॥९॥
Subject
फिर इन्द्र शब्द से अगले मन्त्र में ईश्वर का प्रकाश किया है-

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