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Rigveda Mandal 1 / Sukta 2 / Mantra 9

191 Sukta
9 Mantra
1/2/9
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
क॒वी नो॑ मि॒त्रावरु॑णा तुविजा॒ता उ॑रु॒क्षया॑। दक्षं॑ दधाते अ॒पस॑म्॥

क॒वी इति॑ । नः॒ । मि॒त्रावरु॑णा । तु॒वि॒ऽजा॒तौ । उ॒रु॒ऽक्षया॑ । दक्ष॑म् । द॒धा॒ते॒ इति॑ । अ॒पस॑म् ॥

Mantra without Swara
कवी नो मित्रावरुणा तुविजाता उरुक्षया। दक्षं दधाते अपसम्॥

कवी इति। नः। मित्रावरुणा। तुविऽजातौ। उरुऽक्षया। दक्षम्। दधाते इति। अपसम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 4 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
(तुविजातौ) जो बहुत कारणों से उत्पन्न और बहुतों में प्रसिद्ध (उरुक्षया) संसार के बहुत से पदार्थों में रहनेवाले (कवी) दर्शनादि व्यवहार के हेतु (मित्रावरुणा) पूर्वोक्त मित्र और वरुण हैं, वे (नः) हमारे (दक्षम्) बल तथा सुख वा दुःखयुक्त कर्मों को (दधाते) धारण करते हैं॥९॥
Essence
जो ब्रह्माण्ड में रहनेवाले बल और कर्म के निमित्त पूर्वोक्त मित्र और वरुण हैं, उनसे क्रिया और विद्याओं की पुष्टि तथा धारणा होती है॥९॥
Subject
वे हम लोगों के कौन-कौन पदार्थों के धारण कनरेवाले हैं, इस बात का प्रकाश अगले मन्त्र में किया है-

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