Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 162 / Mantra 14

191 Sukta
22 Mantra
1/162/14
Devata- मित्रादयो लिङ्गोक्ताः Rishi- दीर्घतमा औचथ्यः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
नि॒क्रम॑णं नि॒षद॑नं वि॒वर्त॑नं॒ यच्च॒ पड्बी॑श॒मर्व॑तः। यच्च॑ प॒पौ यच्च॑ घा॒सिं ज॒घास॒ सर्वा॒ ता ते॒ अपि॑ दे॒वेष्व॑स्तु ॥

नि॒ऽक्रम॑णम् । नि॒ऽसद॑नम् । वि॒ऽवर्त॑नम् । यत् । च॒ । पड्बी॑शम् । अर्व॑तः । यत् । च॒ । प॒पौ । यत् । च॒ । घा॒सिम् । ज॒घास॑ । सर्वा॑ । ता । ते॒ । अपि॑ । दे॒वेषु॑ । अ॒स्तु॒ ॥

Mantra without Swara
निक्रमणं निषदनं विवर्तनं यच्च पड्बीशमर्वतः। यच्च पपौ यच्च घासिं जघास सर्वा ता ते अपि देवेष्वस्तु ॥

निऽक्रमणम्। निऽसदनम्। विऽवर्तनम्। यत्। च। पड्बीशम्। अर्वतः। यत्। च। पपौ। यत्। च। घासिम्। जघास। सर्वा। ता। ते। अपि। देवेषु। अस्तु ॥ १.१६२.१४

Ashtak » 2 Adhyay » 3 Varga » 9 Mantra » 4

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे घोड़े के सिखानेवाले ! (अर्वतः) शीघ्र जानेवाले घोड़े का (यत्) जो (निक्रमणम्) निश्चित चलना, (निषदनम्) निश्चित बैठना, (विवर्त्तनम्) नाना प्रकार से चलाना-फिराना (पड्वीशम्, च) और पिछाड़ी बाँधना तथा उसको उढ़ाना है और यह घोड़ा (यत्, च) जो (पपौ) पीता (यत्, घासिम्, च) और जो घास को (जघास) खाता है (ता) वे (सर्वा) समस्त उक्त काम (ते) तुम्हारे हों और यह समस्त (देवेषु) विद्वानों में (अपि) भी (अस्तु) हो ॥ १४ ॥
Essence
जैसे सुन्दर सिखाये हुए घोड़े सुशील अच्छी चाल चलनेवाले होते हैं, वैसे विद्वानों की शिक्षा पाये हुए जन सभ्य होते हैं। जैसे घोड़े आहार भर पी खाके पचाते हैं, वैसे विचक्षण बुद्धि विद्या से तीव्र पुरुष भी हों ॥ १४ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.