दुःखानुशयी द्वेषः॥८॥
शब्दार्थ - (दुःख-अनुशयी) दुःख भोगने के पश्चात् अन्त:करण में दुःख और दुःख के साधनों के प्रति रहने वाली जो विनाश की इच्छा, क्रोध, आक्रोश है (द्वेषः) द्वेष नामक क्लेश है।
सूत्रार्थ - दुःख भोगने के पश्चात् दुःख और दुःख के साधनों के प्रति अन्तःकरण में रहने वाली जो विनाश की इच्छा, क्रोध, आक्रोश है, वह 'द्वेष' नामक क्लेश कहलाता है।