क्लेशा इति पञ्च विपर्यया इत्यर्थः। ते स्यन्दमाना गुणाधिकारं द्रढयन्ति, परिणाम-मवस्थापयन्ति, कार्यकारणस्त्रोत उन्नमयन्ति, परस्परानुग्रहतन्त्रीभूत्वा कर्मविपाकं चाभिनिर्हरन्तीति॥३॥'क्लेश' का अर्थ पाँच विपर्यय (अर्थात् पाँच प्रकार का मिथ्याज्ञान) है।
व्या० भा० अ० - वे वर्त्तमान (प्रवृत्त हुए) गुणों के अधिकार (कार्योत्पादन रूपी गुणों के अधिकार) को बलिष्ठ बनाते है, (कार्यरूप) परिणाम को चलाते हैं, कार्य-कारण के स्रोत को उत्पन्न करते हैं, परस्पर सहयोग देकर कर्म फल को सम्पन्न करते हैं॥३॥