क्लेशानां या वृत्तयः स्थूलास्ताः क्रियायोगेन तनूकृताः सत्यः प्रसंख्यानेन ध्यानेन हातव्या यावत्सूक्ष्मीकृता यावद्दग्धबीजकल्पा इति। यथा वस्त्राणां स्थूलो मलः पूर्वं निर्धूयते पश्चात्सूक्ष्मो यत्नेनोपायेन वापनीयते तथा स्वल्पप्रतिपक्षाः स्थूला वृत्तयः क्लेशानां, सूक्ष्मास्तु महाप्रतिपक्षा इति॥११॥
व्या० भा० अ० - क्लेशों की जो स्थूल वृत्तियाँ हैं वे क्रियायोग द्वारा सूक्ष्म की जाती हैं प्रसङ्ख्यान (विवेकख्याति) के द्वारा नष्ट करने योग्य होती हैं, जिससे सूक्ष्म हो जायें, दग्धबीज के सदृश हो जायें। जिस प्रकार वस्त्रों का स्थूलमल पहले दूर किया जाता है
पश्चात् सूक्ष्ममल प्रयत्न से दूर किया जाता है। उसी प्रकार क्लेशों की स्थूल वृत्तियाँ अल्प प्रयत्न से दूर करने योग्य होती हैं, जबकि सूक्ष्म (वृत्तियाँ) अधिक प्रयत्न के द्वारा दूर करने योग्य होती हैं॥११॥