Yogdarshanam (Swami Satypati Parivrajak) Yogdarshanam / 1/6

1/6
Sutra
प्रमाणविपर्ययविकल्पनिद्रास्मृतयः ॥ १.६ ॥

Yogdarshanam (Swami Satypati Parivrajak)

हिन्दी
Yogdarshanam (Swami Satypati Parivrajak) - हिन्दी
Inception

अव० - ताः क्लिष्टाश्चाक्लिष्टाश्च पञ्चधा वृत्तयः - 

अर्थ - वे क्लिष्ट और अक्लिष्ट वृत्तियाँ पाँच प्रकार की होती हैं।

Word Meaning

प्रमाणविपर्ययविकल्पनिद्रास्मृतयः॥६॥

सूत्रार्थ - प्रमाण, विपर्यय, विकल्प, निद्रा और स्मृति ये पाँच प्रकार की वृत्तियाँ हैं, जिनका लक्षण अगले सूत्रों में बतलाया जाएगा।

Yog Prakash

योगदर्शन में पाँच वृत्तियों को स्वीकार किया गया है। इससे यह ज्ञात होता है कि योगदर्शनकार पाँच वृत्तियों को ही मानता है, न्यूनाधिक को नहीं॥

इन पाँच वृत्तियों के नाम और लक्षणों को अच्छे प्रकार से जानकर साधक इनको रोकने में समर्थ हो जाता है। योगाभ्यास - काल में जब व्यक्ति असावधानी से इनमें से किसी भी वृत्ति को उठा लेता है तो उसको शीघ्र ही यह ज्ञान हो जाता है कि मैंने अब अमुक वृत्ति को उठा लिया है। वृत्ति के स्वरूप का ज्ञान होने से वह उस वृत्ति के कारण की गवेषणा करता है। इस गवेषणा से उसे ज्ञात हो जाता है कि वृत्तियों के उठाने में मैं (आत्मा) एक मुख्य कारण हूँ।

यहाँ यह विषय ज्ञातव्य है कि गम्भीर रोग वा आघात आदि की स्थिति में वह वृत्तियों के उठाने में गौण कारण बनता है।

कभी-कभी योगाभ्यासी को उपासना काल में ऐसा भ्रम हो जाता है कि अब मेरी समस्त वृत्तियाँ रुक गई हैं। यदि ध्यान से देखा जाय तो उस अवस्था में वृत्तियाँ रुकी नहीं होती हैं। इस भ्रान्ति का मुख्य कारण यही है कि व्यक्ति वृत्तियों के नाम और लक्षण को ठीक प्रकार से नहीं जानता। ध्यान करते समय व्यक्ति को कभी निद्रा आ जाती है तब वृत्तियों के स्वरूप का ज्ञान न होने के कारण उस अवस्था को वह वृत्तियों का निरोध मान लेता है। जब योगाभ्यास में वृत्तियों के कारण बाधा आती है तो वृत्तियों के स्वरूप का ज्ञान होने पर उसको यह पता चलता है कि अमुक वृत्ति के कारण बाधा आई है। पाँच वृत्तियों के नाम और लक्षणों को जानने वाला इन पाँचों को रोकने के पश्चात् निश्चिन्त हो जाता है और वह यह अनुभव करता है कि अब मेरी सभी वृत्तियों का अवरोध हो गया है और मैं योग की वास्तविक स्थिति में पहुँच गया हूँ॥६॥

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