Yogdarshanam Paad 3 / Sutra 24
बलेषु हस्तिबलादीनि॥२४॥
शब्दार्थ - (बलेषु) हस्ति आदि बलों में संयम करने से, (हस्ति-बलादीनि) हस्ति बलादि प्राप्त होते हैं।
सूत्रार्थ हाथी आदि के बलों में संयम करने से हाथी आदि के बल की भाँति अधिक बल की प्राप्ति होती है।
हस्तिबले संयमाद् हस्तिबलो भवति। वैनतेयबले संयमाद्वैनतेयबलो भवति। वायुबले संयमाद्वायुबलो भवतीत्येवमादि॥२४॥
व्या० भा० अ० - हाथी के बल में संयम करने से (योगी) हाथी के (सदृश) बल से सम्पन्न हो जाता है। गरुड़ के बल में संयम (करने) से गरुड़ के (सदृश) बल वाला हो जाता है। वायु के बल में संयम (करने) से वायु के (सदृश) बल वाला हो जाता है। इस प्रकार अन्य भी (जान लेने चाहिए )।। २४॥
इस सूत्र में यह बतलाया है कि हाथी आदि बलयुक्त पदार्थों में संयम करने से बल की प्राप्ति होती है।
बल की प्राप्ति का प्रकार - जब व्यक्ति किसी महान् बलवान् पुरुष को देखता है और स्वयं उस जैसा बलवान् बनना चाहता है। तब उसके खान-पान, व्यायाम आदि सभी व्यवहारों को देखता है और उसी की भांति स्वयं भी व्यवहार करता है तथा मन में उसी जैसा बनने की तीव्र इच्छा करता है, तो उसी के समान बलवान् हो जाता है। केवल महापुरुष के बल में संयम करने मात्र से उस जैसा बलवान् नहीं बन सकता। इसी प्रकार से सर्वत्र जानना चाहिये।
यदि कोई व्यक्ति यह मानता हो कि जिसमें संयम करते हैं उसका बल संयम करने वाले को प्राप्त होता है तो उसके अनुसार जिसमें संयम किया गया है उसका बल न्यून होना चाहिए। किन्तु ऐसा नहीं होता। इससे यह जानना चाहिए कि संयम मात्र से बल नहीं प्राप्त होता। दूसरी बात यह भी जाननी चाहिए कि क्या योगी वायु के बल में संयम करने से वायु जितना बल प्राप्त कर लेता है अथवा नहीं। यदि वायु जितना बल प्राप्त कर लेता है तो क्या समुद्र में वायु के बल से जो तूफान आता है तो उतना तूफान समुद्र में योगी के बल से आ सकता है ? भूमि के बल में संयम करने से भूमि जितना बल योगी में आ सकता है ? इसका समाधान यह है कि वायु और भूमि जितना बल योगी में नहीं आता। किन्तु मनुष्य की स्थिति के अनुसार योगी के बल की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिये बलशाली पदार्थों के बल को देखकर बल के साधनों का अनुष्ठान करने से योगी का बल बढ़ जाता है॥२४॥