Yogdarshanam Paad 2 / Sutra 42

2/42
Sutra
संतोषादनुत्तमः सुखलाभः ।। २.४२ ।।

Bhashya

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Word Meaning

शब्दार्थ - (सन्तोषात्) पूर्ण सन्तोष का पालन करने से (अनुत्तम-सुखलाभः) सांसारिक समस्त सुखों से उत्तम सुख की प्राप्ति होती है।

सूत्रार्थ - पूर्ण सन्तोष का पालन करने वाले योगी को समस्त सांसारिक सुखों से उत्तम सुख की प्राप्ति होती है।

Vyas Bhashya

तथा चोक्तम्-यच्च कामसुखं लोके यच्च दिव्यं महत्सुखम्। तृष्णाक्षयसुखस्यैते नार्हतः षोडशीं कलाम्॥इति॥४२॥

व्या० भा० अ० और उसी प्रकार कहा गया है - लोक में जो कामजन्य सुख है और जो महान् स्वर्ग सुख है, ये दोनों सुख तृष्णा के क्षय से होने वाले सुख का सोलहवाँ भाग भी नहीं हो सकते॥४२॥

Yog Prakash

इस सूत्र में सन्तोष का फल बतलाया है। जब व्यक्ति पूर्ण पुरुषार्थ के पश्चात् अपने उपलब्ध साधनों से अधिक पदार्थों की इच्छा नहीं करता तो उसको अनुत्तम सुख की प्राप्ति होती है। जब वह संसार के प्रत्येक सुख को क्षणिक देखता है और उसमें परिणाम, ताप, संस्कार और गुणवृत्तिविरोध दुःख इन चार प्रकार के दुःखों को मिश्रित देखता है तो विषय भोगों में और उनके साधनों में तृष्णा नहीं रहती। तृष्णारहित अवस्था में जो सुख का अनुभव होता है वह इतना महान् होता है कि विषय भोगों का सुख उसके सोलहवें भाग के समान भी नहीं होता है। जब व्यक्ति इन्द्रियों के भोगों में आसक्त रहता है तो उसकी विषय भोग की तृष्णा बढ़ती जाती है और वह उस तृष्णा की पूर्ति के लिये प्रयासशील रहता है। प्रयास करने पर भी उसको विषय भोग की सामग्री नहीं मिलती तो उसको बहुत दुःख होता है। इस स्थिति को देखकर व्यक्ति विषयभोग की इच्छा का ही परित्याग कर देता है। इससे वह व्यक्ति दुःख से बच जाता है और सुख का अनुभव करता है। यह सन्तोष के पालन करने से मिलने वाला सात्त्विक सुख है और यह सत्त्वगुण से प्राप्त होता है।

सन्तोष के पालन करने का यह भी फल है कि विषय भोगों को छोड़कर व्यक्ति योगाभ्यास करता है तो मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्ष का सुख अनुत्तम सुख है उसके साथ किसी भी सांसारिक सुख की वास्तविक तुलना नहीं हो सकती। सन्तोष का पालन करने से व्यवहार में भी सुख की प्राप्ति और दुःख की निवृत्ति होती है। जब कोई हानिकारक घटना घट जाती है तो सन्तोषी व्यक्ति को दुःख नहीं होता अथवा न्यून दुःख होता है। इसलिये सन्तोष का पालन योग सिद्धि के साथ व्यवहार की सिद्धि के लिए भी उपयोगी है॥४२॥

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