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Atharvaveda - Mantra 7

Atharvaveda 4/6/7

40 Sukta
8 Mantra
4/6/7
Devata- विषम् Rishi- गरुत्मान् Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- विषघ्न सूक्त
Mantra with Swara
ये अपी॑ष॒न्ये अदि॑ह॒न्य आस्य॒न्ये अ॒वासृ॑जन्। सर्वे॑ ते॒ वध्र॑यः कृ॒ता वध्रि॑र्विषगि॒रिः कृ॒तः ॥

ये । अपी॑षन् । ये । अदि॑हन् । ये । आस्य॑न् । ये । अ॒व॒ऽअसृ॑जन् । सर्वे॑ । ते । वध्र॑य: । कृ॒ता: । वध्रि॑: । वि॒ष॒ऽगि॒रि: । कृ॒त: ॥६.७॥

Mantra without Swara
ये अपीषन्ये अदिहन्य आस्यन्ये अवासृजन्। सर्वे ते वध्रयः कृता वध्रिर्विषगिरिः कृतः ॥

ये । अपीषन् । ये । अदिहन् । ये । आस्यन् । ये । अवऽअसृजन् । सर्वे । ते । वध्रय: । कृता: । वध्रि: । विषऽगिरि: । कृत: ॥६.७॥

Meaning
१. (ये) = जो लोग (अपीषन्) = विषोपादान औषध को पीसकर देते हैं, (ये) = जो लोग (अदिहन) = इस विष का लेप करते हैं, (ये आस्यन्) = जो विष को दूर से शरीर पर फेंकते हैं-ऐसिड आदि डाल देते हैं, (ये अवासृजन) = जो समीपस्थ होते हुए अन्न-पान आदि में विष मिला देते हैं, (ते सर्वे) = वे सब (बध्रयः कृता:) = उचित दण्ड-व्यवस्था के द्वारा निर्वीर्य किये जाते हैं। राजा इन्हें दण्डित करता हुआ इन पापों से रोकता है २. (विषगिरिः) = कन्दमूल आदि के विष का उत्पत्तिहेतुभत पर्वत भी (वध्रिः कृत:) = निवार्य किया गया है। ऐसे पर्वतों पर भी राजा सामान्य लोगों के आने-जाने पर प्रतिबन्ध लगाता है, तब उस पर्वत के कन्दमूल आदि का दुरुपयोग नहीं हो पाता।
Essence
राजा विविध प्रकार से विष देनेवालों को दण्डित करे। विषोत्पत्ति स्थानों पर सामान्य लोगों के आने-जाने को निषिद्ध कर दे।
Subject
विषदाताओं को दण्डित करना

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