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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 3/14/4

31 Sukta
6 Mantra
3/14/4
Devata- गौः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गोष्ठ सूक्त
Mantra with Swara
इ॒हैव गा॑व॒ एत॑ने॒हो शके॑व पुष्यत। इ॒हैवोत प्र जा॑यध्वं॒ मयि॑ सं॒ज्ञान॑मस्तु वः ॥

इ॒ह । ए॒व । गा॒व॒: । आ । इ॒त॒न॒ । इ॒हो॒ इति॑ । शका॑ऽइव । पु॒ष्य॒त॒ । इ॒ह । ए॒व । उ॒त । प्र । जा॒य॒ध्व॒म् । मयि॑ । स॒म्ऽज्ञान॑म् । अ॒स्तु॒ । व॒: ॥१४.४॥

Mantra without Swara
इहैव गाव एतनेहो शकेव पुष्यत। इहैवोत प्र जायध्वं मयि संज्ञानमस्तु वः ॥

इह । एव । गाव: । आ । इतन । इहो इति । शकाऽइव । पुष्यत । इह । एव । उत । प्र । जायध्वम् । मयि । सम्ऽज्ञानम् । अस्तु । व: ॥१४.४॥

Meaning
१. हे (गाव:) = गौओ! (इह एव) = यहाँ ही (एतन) = आओ-हमारे गोष्ठ में तुम्हारी स्थिति हो। (इह उ) = और यहाँ ही (शका इव पुष्यत) = समर्था गृहपली के समान पोषण करनेवाली होओ (उत) = और (इह एव) = यहाँ और यहाँ ही (प्रजायध्वम्) = बच्चों [बछड़े-बछड़ियों] से बढ़ो। (मयि) = मेरे विषय में (वः) = तुम्हारा (संज्ञानम्) = प्रेम (अस्तु) = हो।
Essence
हमारे गोष्ठ में वृद्धि को प्राप्त होती हुई गौएँ हमारा पोषण करनेवाली हों। उन गौओं के साथ हमारा प्रेम हो।
Subject
समृद्ध होती हुई गौएँ हमारा पोषण करें

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