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Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 16/1/5

9 Sukta
13 Mantra
16/1/5
Devata- द्विपदा साम्नी पङ्क्ति Rishi- प्रजापति Chhanda- अथर्वा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
तेन॒तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒स्मान्द्वे॑ष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥

तेन॑ । तम् । अ॒॒भिऽअति॑सृजाम: । य: । अ॒स्मान् । द्वेष्टि॑ । यम् । व॒यम् । द्वि॒ष्म: ॥१.५॥

Mantra without Swara
तेनतमभ्यतिसृजामो योस्मान्द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः ॥

तेन । तम् । अभिऽअतिसृजाम: । य: । अस्मान् । द्वेष्टि । यम् । वयम् । द्विष्म: ॥१.५॥

Meaning
१. (यः) = जो यह 'काम'-रूप शत्रु (अस्मान् द्वेष्टि:) = हमारे साथ प्रीति नहीं करता और (यम्) = जिसको (वयम्) = हम भी (द्विष्मः) = प्रिय नहीं जानते, (तेन) = उस हेतु से (तम्) = उस काम को (अतिसृजाम:) = सुदूर छोड़ने के लिए यत्नशील होते हैं। यह हमारे विनाश का कारण बनता है। आत्मविनाश से बचने के लिए काम का परित्याग आवश्यक ही है।
Essence
कामरूप शत्रु हमारे साथ कभी प्रीति नहीं कर सकता। इसे दूर करना आवश्यक ही है।
Subject
सर्वमहान् शत्रु

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