Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 9 / Mantra 29

40 Mantra
9/29
Devata- अर्य्यमादिमन्त्रोक्ता देवताः Rishi- तापस ऋषिः Chhand- भूरिक आर्षी गायत्री, Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र नो॑ यच्छत्वर्य॒मा प्र पू॒षा बृह॒स्पतिः॑। प्र वाग्दे॒वी द॑दातु नः॒ स्वाहा॑॥२९॥

प्र। नः॒। य॒च्छ॒तु॒। अ॒र्य्य॒मा। प्र। पू॒षा। प्र। बृह॒स्पतिः॑। प्र। वाक्। दे॒वी। द॒दा॒तु॒। नः॒। स्वाहा॑ ॥२९॥

Mantra without Swara
प्र नो यच्छत्वर्यमा प्र पूषा प्र बृहस्पतिः । प्र वाग्देवी ददातु नः स्वाहा ॥

प्र। नः। यच्छतु। अर्य्यमा। प्र। पूषा। प्र। बृहस्पतिः। प्र। वाक्। देवी। ददातु। नः। स्वाहा॥२९॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
(अर्यमा ) अर्यमा, न्यायाधीश ( पूषा ) राष्ट्र का पोषक, सब को वेतनादि देने हारा, भागधुक् नामक वेतनाध्यक्ष या कराध्यक्ष ( बृहस्पतिः ) वेद का विद्वान् और ये सब ( प्रयच्छतु ) हमें उत्तम पदार्थ प्रदान करें और ( वाग् देवी ) वाणी, देवी अथवा विद्या से युक्त (देवी) माता (नः) हमें ( स्वाहा ) उत्तम रीति से ज्ञान और पुष्टि ( प्र ददातु ) प्रदान 
करे ॥ शत० ५२ ।२ । ११ ॥ 
Subject
न्यायाधीश आदि के कर्त्तव्य।
Footenote
२९ ० बृहस्पतिः प्र सरस्वती । प्र वाग्' ० इति काण्व० ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
तापस ऋषिः । अर्यमादयो देवताः । भुरिगार्षी गायत्री । षड्जः ॥