Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 5 / Mantra 3

43 Mantra
5/3
Devata- यज्ञो देवता Rishi- गोतम ऋषिः Chhand- आर्षी पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
भव॑तं नः॒ सम॑नसौ॒ सचे॑तसावरे॒पसौ॑। मा य॒ज्ञꣳ हि॑ꣳसिष्टं॒ मा य॒ज्ञप॑तिं जातवेदसौ शि॒वौ भ॑वतम॒द्य नः॑॥३॥

भव॑तम्। नः॒। सम॑नसा॒विति॒ सऽम॑नसौ। सचे॑तसा॒विति॒ सऽचे॑तसौ। अ॒रे॒पसौ॑। मा। य॒ज्ञम्। हि॒सि॒ष्ट॒म्। मा। य॒ज्ञप॑ति॒मिति॑ य॒ज्ञऽप॑तिम्। जा॒त॒वे॒द॒सा॒विति॑ जातऽवेदसौ। शि॒वौ। भ॒व॒त॒म्। अ॒द्य। नः॒ ॥३॥

Mantra without Swara
भवतन्नः समनसौ सचेतसावरेपसौ । मा यज्ञँ हिँसिष्टंम्मा यज्ञपतिञ्जातवेदसौ शिवौ भवतमद्य नः ॥

भवतम्। नः। समनसाविति सऽमनसौ। सचेतसाविति सऽचेतसौ। अरेपसौ। मा। यज्ञम्। हिसिष्टम्। मा। यज्ञपतिमिति यज्ञऽपतिम्। जातवेदसाविति जातऽवेदसौ। शिवौ। भवतम्। अद्य। नः॥३॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
हे स्त्री और पुरुष तुम दोनो ! ( नः ) हममें ( सचेतसौ ) समान चित्त वाले ( अरेपसौ ) पापरहित ( समनसौ ) एक समान ज्ञान या संकल्प विकल्प वाले ( भवतम् ) होकर रहो। तुम दोनों ( यज्ञम् ) एक दूसरे के प्रति परस्पर दान या परस्पर के संग को ( मा हिंसिष्टम् ) विनाश मत करो । ( यज्ञपतिम् ) इस यज्ञ के पालक को भी नाश मत करो । ( जातवेदसौ ) धन और ज्ञान से युक्त होकर ( अद्य ) आज से ( नः ) हमारे लिये (शिवौ) कल्याण और सुखकारी (भवतम्) होकर रहो। इसी प्रकार अध्यापक शिष्य, राजा प्रजा, राजा सचिव आदि पर भी यह मन्त्र समान रूप से लगता है | शत० ३ । ४ । १ । २०-२३ ॥
Subject
स्त्री पुरुषों को परस्पर प्रेम से रहने का उपदेश ।
Footenote
३ --०`सचेतसा अरेप०`इति काण्व०॥
 
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
प्रजापतिःऋषिः। यज्ञो दवेता । पंक्तिः । पञ्चमः स्वरः ॥