Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 35 / Mantra 11

22 Mantra
35/11
Devata- आपो देवताः Rishi- आदित्या देवा ऋषयः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अपा॒घमप॒ किल्वि॑ष॒मप॑ कृ॒त्यामपो॒ रपः॑।अपा॑मार्ग॒ त्वम॒स्मदप॑ दुः॒ष्वप्न्य॑ꣳ सुव॥११॥

अप॑। अ॒घम्। अप॑। किल्वि॑षम्। अप॑। कृ॒त्याम्। अपो॒ऽइत्यपोः॑। रपः॑ ॥ अपा॑मार्ग। अप॑मा॒र्गेत्यप॑ऽमार्ग। त्वम्। अ॒स्मत्। अप॑। दुः॒ष्वप्न्य॑म्। दुः॒ष्वप्न्य॒मिति॑ दुः॒ऽस्वप्न्य॑म्। सु॒व॒ ॥११ ॥

Mantra without Swara
अपाघमप किल्विषमप कृत्यामपो रपः । अपामार्ग त्वमस्मदप दुःष्वप्न्यँ सुव ॥

अप। अघम्। अप। किल्विषम्। अप। कृत्याम्। अपोऽइत्यपोः। रपः॥ अपामार्ग। अपमार्गेत्यपऽमार्ग। त्वम्। अस्मत्। अप। दुःष्वप्न्यम्। दुःष्वप्न्यमिति दुःऽस्वप्न्यम्। सुव॥११॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
हे (अपामार्ग ) दुष्टों को दूर करके राष्ट्र के कण्टकों को शोधन करने हारे राष्ट्रपते ! (त्वम्) तू ( अस्मत् ) हमसे ( अघम् अप सुव ) पाप, परस्पर के घात प्रतिघात को दूर कर । (किल्विषम् अप सुव) व्यर्थ, विचारशून्यता से पर- अपकार करने के पाप कृत्य को दूर कर । ( कृत्याम् अप सुव) शत्रु से प्रयुक्त गुप्त हत्या के घातक प्रयोग को दूर कर । (रपः अप) बलात्कार से स्त्री आदि पर किये व्यभिचार आदि पाप को भी दूर कर । (दुःस्वप्न्यम् अप सुव) दुःखसहित निद्रा होने के कारण को भी दूर कर । अघ, किल्विष, कृत्या, रपः, दुष्वन्य आदि यद्यपि सभी सामान्यतः पापवाचक हैं, वे भिन्न-भिन्न प्रकारों के अपराधों को दिखाते हैं । कृत्या 'दुष्वप्न्य' और अपामार्ग के प्रकरण अथर्ववेद भाष्य में स्पष्ट से किये हैं । अपामार्ग औषधि, जैसे स्वप्नदोष आदि रोगों को दूर करती है । उसी के सदृश से प्रजा के भीतर से पापों और हत्या आदि दुष्कर्मों को दूर करने वाला 'अधिकारी' भी अपामार्ग है ।
Subject
पापनाश ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
शुनः शेपः । अपः । विराडनुष्टुप् । गान्धारः ॥