Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 34 / Mantra 53

58 Mantra
34/53
Devata- लिङ्गोक्ता देवताः Rishi- ऋजिष्व ऋषिः Chhand- भुरिक् पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
उ॒त नोऽहि॑र्बु॒ध्न्यः शृणोत्व॒जऽएक॑पात् पृथि॒वी स॑मु॒द्रः।विश्वे॑ दे॒वाऽऋ॑ता॒वृधो॑ हुवा॒नाः स्तु॒ता मन्त्राः॑ कविश॒स्ताऽअ॑वन्तु॥५३॥

उ॒त। नः॒। अहिः॑। बु॒ध्न्यः᳖। शृ॒णो॒तु॒। अ॒जः। एक॑पा॒दित्येक॑ऽपात्। पृ॒थि॒वी। स॒मु॒द्रः ॥ विश्वे॑। दे॒वाः। ऋ॒ता॒वृधः॑। ऋ॒त॒वृध॒ इत्यृ॑त॒ऽवृधः॑। हु॒वा॒नाः। स्तु॒ताः। मन्त्राः॑। क॒वि॒श॒स्ता इति॑ कविऽश॒स्ताः। अ॒व॒न्तु॒ ॥५३ ॥

Mantra without Swara
उत नोहिर्बुध्न्यः शृणोत्वजऽएकपात्पृथिवी समुद्रः । विश्वे देवाऽऋतावृधो हुवाना स्तुता मन्त्राः कविशस्ताऽअवन्तु ॥

उत। नः। अहिः। बुध्न्यः। शृणोतु। अजः। एकपादित्येकऽपात्। पृथिवी। समुद्रः॥ विश्वे। देवाः। ऋतावृधः। ऋतवृध इत्यृतऽवृधः। हुवानाः। स्तुताः। मन्त्राः। कविशस्ता इति कविऽशस्ताः। अवन्तु॥५३॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
राजपक्ष में- ( बुधम्य: ) अन्तरिक्ष में उत्पन्न होने वाला (अहिः) मेघ के समान सबके ऊपर शासक पद पर रह कर कभी न क्षीण होने वाला, सदा ऐश्वर्यों का वर्धक, (एकपात्) एकमात्र मोक्षरूप पाद चरण या स्वरूप से युक्त, (अज) कभी उत्पन्न न होने वाले परमेश्वर के समान स्वयं (एकपात्) एक अद्वितीय होकर राष्ट्र के पालन करने वाला (अज) सब राष्ट्र का मुख्य सञ्चालक, शत्रुओं का स्वयं उच्छेत्ता, (पृथिवी ) पृथिवी के समान सर्वाश्रय और (समुद्रः) समुद्र के समान गम्भीर अनेक रत्नों का आश्रय, (नः शृणोतु) हमारे कष्टों और प्रार्थनाओं को श्रवण करे । (विश्वे) समस्त (ऋतावृधः) सत्य ज्ञान और ऐश्वर्य को बढ़ाने वाले (हुवानाः) एक दूसरे से स्पर्धापूर्वक बढ़ने हारे (देवा:) देवगण और ( कविशस्ताः ) विद्वान् दीर्घदर्शी पुरुषों से कहे गये, (स्तुताः) स्तुतियुक्त एवं उत्तम ( मन्त्राः) मनन करने योग्य विचार एवं वेदमन्त्र सभी (नः अवन्तु) हमारी रक्षा करें। (२) परमेश्वर सर्वाश्रय होने से 'बुध्न्य' है । कभी नाश न होने से 'अहि' है । उत्पन्न न होने से 'अज' है । एकमात्र ज्ञानमय मोक्षस्वरूप होने से 'एकपात् ' है । सर्वाश्रय और सब जगत् का विस्तार करने वाला होने से 'पृथिवी' है, समस्त लोकों का उद्भव होने से 'समुद्र' है । वह हमारी प्रार्थना श्रवण करे ।
Subject
सुवर्ण और उत्तम सैन्य बल का वर्णन । पक्षान्तर में ब्रह्मचर्य का वर्णन ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
ऋजिश्वा । लिंगोक्ताः । भुरिक् पङ्क्तिः । पंचमः ॥