Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 33 / Mantra 79

97 Mantra
33/79
Devata- इन्द्रो देवता Rishi- अगस्त्य ऋषिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अनु॑त्त॒मा ते॑ मघव॒न्नकि॒र्नु न त्वावाँ॑२ऽअस्ति दे॒वता॒ विदा॑नः।न जाय॑मानो॒ नश॑ते॒ न जा॒तो यानि॑ करि॒ष्या कृ॑णु॒हि प्र॑वृद्ध॥७९॥

अनु॑त्त॒म्। आ। ते॒। म॒घ॒व॒न्निति॑ मघऽवन्। नकिः॑। नु। न। त्वावा॒न्निति त्वाऽवा॑न्। अ॒स्ति॒। दे॒वता॑ विदा॑नः ॥ न। जाय॑मानः। नश॑ते। न। जा॒तः। यानि॑। क॒रि॒ष्या। कृ॒णु॒हि। प्र॒वृ॒द्घेति॑ प्रऽवृद्ध ॥७९ ॥

Mantra without Swara
अनुत्तमा ते मघवन्नकिर्नु न त्वावाँऽअस्ति देवता विदानः । न जायमानो नशते न जातो यानि करिष्या कृणुहि प्रवृद्ध ॥

अनुत्तम्। आ। ते। मघवन्निति मघऽवन्। नकिः। नु। न। त्वावान्निति त्वाऽवान्। अस्ति। देवता विदानः॥ न। जायमानः। नशते। न। जातः। यानि। करिष्या। कृणुहि। प्रवृद्घेति प्रऽवृद्ध॥७९॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
हे ( मघवन् ) ऐश्वर्यवन् राजन् (नकिः) कोई भी पदार्थ ऐसा नहीं जो ( ते अनुत्तम् ) तेरे द्वारा नहीं चलाया गया । तु ही सबका प्रेरक है और (स्वावान् देवता) तेरे सदृश द्रष्टा और दानशील, (विदानः)ज्ञानवान् और समस्त पदार्थों का प्राप्त करने कराने वाला भी दूसरा (न अस्ति ) नहीं है । हे ( प्रवृद्ध ) महान्, सबसे अधिक शक्तिशालिन् ! ( न जायमानः) न भविष्य में कोई पैदा होने वाला और (न जातः) न पैदा हुआ है जो (यानि करिण्या) जिन कामों को तू भावी में करे या ( कृणुहि ) अब करता है उनको भी ( नशते) प्राप्त कर सके । (२) परमेश्वर के पक्ष में- (ते) तेरे स्वरूप को (अनुत्तम् आ ) हम किसी अन्य से प्रेरित नहीं पाते अर्थात् तू अद्वितीय है । ( न त्वावान् विदानः देवता अस्ति) तेरे जैसा ज्ञानवान् देव भी कोई नहीं है। तु (जायमानः न, जात: न ) तू कभी न पैदा होता है, न हुआ है । (यानि करिष्या) जो करेगा और जो (कृणुहि ) करता है उसको भी (नकि: नशते) कोई न जान सकता है न उसका पार पा सकता है ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
अगस्त्यः । इन्द्रः । त्रिष्टुप् । धैवतः ॥