Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 33 / Mantra 75

97 Mantra
33/75
Devata- विद्वान् देवता Rishi- विश्वामित्र ऋषिः Chhand- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
आ रोद॑सीऽअपृण॒दा स्व॑र्म॒हज्जा॒तं यदे॑नम॒पसो॒ऽअधा॑रयन्।सोऽअ॑ध्व॒राय॒ परि॑ णीयते क॒विरत्यो॒ न वाज॑सातये॒ चनो॑हितः॥७५॥

आ। रोद॑सी॒ऽइति॒ रोद॑सी। अ॒पृ॒ण॒त्। आ। स्वः॑। म॒हत्। जा॒तम्। यत्। ए॒न॒म्। अ॒पसः॑। अधा॑रयन् ॥ सः। अ॒ध्व॒राय॑। परि॑। नी॒य॒ते॒। क॒विः। अत्यः॑। न। वाज॑सातये॒ऽइति॒ वाज॑ऽसातये। चनो॑हित॒ऽइति॒ चनः॑ऽहितः ॥७५ ॥

Mantra without Swara
आ रोदसीऽअपृणदा स्वर्महज्जातन्यदेनमपसोऽअधारयन् । सोऽअध्वराय परिणीयते कविरत्यो न वाजसातये चनोहितः ॥

आ। रोदसीऽइति रोदसी। अपृणत्। आ। स्वः। महत्। जातम्। यत्। एनम्। अपसः। अधारयन्॥ सः। अध्वराय। परि। नीयते। कविः। अत्यः। न। वाजसातयेऽइति वाजऽसातये। चनोहितऽइति चनःऽहितः॥७५॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
सूर्य प्रकाश से आकाश और पृथिवी दोनों को व्याप लेता हैं उसी प्रकार तेजस्वी विद्वान्, पुरुष ( रोदसी) शास्य और शासक दोनों वर्गों को ( आ अपुणत् ) व्यापता और उनको पालन और पूर्ण भी करता है । वह (स्व:) अन्तरिक्ष को वायु के समान, ( महत् जातम् ) उत्पन्न हुए सुखमय बड़े राष्ट्र को भी वश करता है । (यत्) जिससे ( एनम् ) उसको (अपसः) समस्त कर्म, अथवा कार्य करने वाला प्रजाजन ( अधारयन् ) धारण करते हैं, वह सब कर्मों का आश्रय हो जाता है । (सः) उसको (कविः)क्रान्तदर्शी, दूरदर्शी पुरुष (अध्वराय) नष्ट न होने वाले, हिंसारहित, पालन करने के उत्तम कर्म के लिये (वाजसातये अत्य: न), संग्राम, ऐश्वर्य और वेगयुक्त कार्य करने के लिये अश्व के समान (परिणीयते) नियुक्त किया जाता है, वरण किया जाता है । वह (चनोहितः) अन्न आदि ऐश्वर्य को धारण करने वाला होता है । (२) अग्नि के पक्ष में- सूर्य रूप से द्यौ और पृथिवी को व्यापता, पोषता है । समस्त कर्मों को धारण करता है । हिंसारहित शिल्पों में और अश्व के समान यन्त्रों में भी वेग प्राप्त करने के लिये लगाया जाता है। (३) परमेश्वर भी सर्वत्र व्यापक, सबका पोषक है । समस्त कर्मो आश्रय है, वह क्रान्तदर्शी महान् यज्ञ के लिये पुनः-पुनः उपासना किया जाता एवं समस्त ऐश्वर्यो का पोषक है ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
विश्वामित्र ऋषिः । विद्वान् वैश्वानरो देवता । निचृत् जगती । निषादः ॥