Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 30 / Mantra 20

22 Mantra
30/20
Devata- राजेश्वरौ देवते Rishi- नारायण ऋषिः Chhand- भुरिगतिजगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
न॒र्माय॑ पुँश्च॒लू हसा॑य॒ कारिं॒ याद॑से शाब॒ल्यां ग्रा॑म॒ण्यं] गण॑कमभि॒क्रोश॑कं॒ तान्मह॑से वीणावा॒दं पा॑णि॒घ्नं तू॑णव॒ध्मं तान्नृ॒त्ताया॑न॒न्दाय॑ तल॒वम्॥२०॥

न॒र्माय॑। पुं॒श्च॒लूम्। हसा॑य। कारि॑म्। याद॑से। शा॒ब॒ल्याम्। ग्रा॒म॒ण्य᳕म्। ग्रा॒म॒न्य᳕मिति॑ ग्राम॒ऽन्य᳕म्। गण॑कम्। अ॒भि॒क्रोश॑क॒मित्य॑भि॒ऽक्रोश॑कम्। तान्। मह॑से। वी॒णा॒वा॒दमिति॑ वीणाऽवा॒दम्। पाणि॒घ्नमिति॑ पाणि॒ऽघ्नम्। तू॒ण॒व॒ध्ममिति॑ तूणव॒ऽध्मम्। तान्। नृ॒त्ताय॑। आ॒न॒न्दायेत्या॑ऽन॒न्दाय॑। त॒ल॒वम् ॥२० ॥

Mantra without Swara
नर्माय पुँश्चलूँहसाय कारिँयादसे शाबल्याङ्ग्रामण्यङ्गणकमभिक्रोशकन्तान्महसे वीणावादम्पाणिघ्नन्तूणवध्मन्तान्नृतायानन्दाय तलवम् ॥

नर्माय। पुंश्चलूम्। हसाय। कारिम्। यादसे। शाबल्याम्। ग्रामण्यम्। ग्रामन्यमिति ग्रामऽन्यम्। गणकम्। अभिक्रोशकमित्यभिऽक्रोशकम्। तान्। महसे। वीणावादमिति वीणाऽवादम्। पाणिघ्नमिति पाणिऽघ्नम्। तूणवध्ममिति तूणवऽध्मम्। तान्। नृत्ताय। आनन्दायेत्याऽनन्दाय। तलवम्॥२०॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
(१५३) (नर्माय) कोमल, मन लुभाने वाले वचनों को बोलने में लगी (पुंश्चलुम् ) व्यभिचारिणी स्त्री को दूर करो। (१५४) (हसाय)
उपहास के लिये ( कारिम् ) नकल उतारने वाले को दण्डित करे । अथवा शोभाजनक पदार्थों को बनाने के लिये कारीगर शिल्पी को नियुक्त करे । (१५५ ) ( याद से शाबल्याम् ) जल जन्तुओं की रक्षा के लिये 'शबल' ' अर्थात् मलिन कार्य करने वाली जाति को दूर करो जिससे वे उनका विनाश न करें। (१५६ - १५८) (महसे) बड़े कारबार या राज्यप्रबन्ध के लिये ( ग्रामण्यम् ) ग्रामनायक, ( गणकम् ) गणक, हिसाब में चतुर और ( अभिक्रोशम् ) सबको बुलाने वाले ( तान् ) इन तीन को नियुक्त करे । (१५९-१६१) (नृत्ताय ) नृत्य के लिये ( वीणावादम् ) वीणा बजाने वाले, ( पाणिघ्नम् ) हाथ से तबले आदि बजाने और ( तूणवध्मम् ) तुरही बजाने वाले को नियुक्त करो । ( १६२ ) ( आनन्दाय तलवम् ) आनन्द, प्रसन्नता के लिये करताल बजाने वाले को नियुक्त करो ।
Subject
ब्रह्मज्ञान, क्षात्रबल, मरुद् ( वैश्य ) विज्ञान आदि नाना ग्राह्य शिल्प पदार्थों की वृद्धि और उसके लिये ब्राह्मण, क्षत्रियादि उन-उन पदार्थों के योग्य पुरुषों की राष्ट्ररक्षा के लिये नियुक्ति । त्याज्य कार्यों के लिये उनके कर्त्ताओं को दण्ड का विधान ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
भुरिगतिजगती । निषादः ॥