Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 3 / Mantra 55

63 Mantra
3/55
Devata- मनो देवता Rishi- बन्धुर्ऋषिः Chhand- निचृत् गायत्री, Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पुन॑र्नः पितरो॒ मनो॒ ददा॑तु॒ दैव्यो॒ जनः॑। जी॒वं व्रात॑ꣳसचेमहि॥५५॥

पुनः॑। नः॒। पि॒त॒रः॒। मनः॑। ददा॑तु। दैव्यः॑। जनः॑। जी॒वम्। व्रा॑तम्। स॒चे॒म॒हि॒ ॥५५॥

Mantra without Swara
पुनर्नः पितरो मनो ददातु दैव्यो जनः । जीवँ व्रातँ सचेमहि ॥

पुनः। नः। पितरः। मनः। ददातु। दैव्यः। जनः। जीवम्। व्रातम्। सचेमहि॥५५॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
-हे ( पितरः ) पालक पूजनीय पुरुषो ! ( दैव्यः जनः ) देवों, विद्वानों में सुशिक्षित या देव परमेश्वर में निष्ट आचार्य या देव, ईश्वरीय दिव्य शक्तियों, ईश्वर प्रदत्त आध्यात्म प्राणों का वशीकर्ता, विज्ञ ( जनः ) जन ( नः ) हमें ( पुनः ) पुन: २ ( मनः ) ज्ञान ( ददातु ) प्रदान करे । हम लोग ( जीवं ) जीवन और (व्रातम् ) उत्तम व्रतों, कर्मों को ( सचे- महि ) प्राप्त हों । अर्थात् राज्य के पालक लोगों के प्रबन्ध से विद्वान् पुरुषों से हम ज्ञान प्राप्त करें, दीर्घ जीवन जीवें और सत्कर्म करें || शत० २ । ६ । १ । ३९ ॥ 
Subject
ज्ञान और दीर्घायु की प्राप्ति ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
बन्धुःऋषिः । मनो देवता । निचृद् गायत्री । षड्जः स्वरः ॥