Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 3 / Mantra 23

63 Mantra
3/23
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वैश्वामित्रो मधुच्छन्दा ऋषिः Chhand- विराट् गायत्री, Swara- षड्जः
Mantra with Swara
राज॑न्तमध्व॒राणां॑ गो॒पामृ॒तस्य॒ दीदि॑विम्। वर्द्ध॑मान॒ꣳ स्वे दमे॑॥२३॥

राज॑न्तम्। अ॒ध्व॒राणा॑म्। गो॒पाम्। ऋ॒तस्य॑। दीदि॑विम्। वर्ध॑मानम्। स्वे। दमे॑ ॥२३॥

Mantra without Swara
राजन्तमध्वराणाङ्गोपामृतस्य दीदिविम् । वर्धमानँ स्वे दमे ॥

राजन्तम्। अध्वराणाम्। गोपाम्। ऋतस्य। दीदिविम्। वर्धमानम्। स्वे। दमे॥२३॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( राजन्तम् ) सर्वत्र यश और प्रताप से प्रकाशमान ( अध्वराणाम् ) शत्रुओं से न नाश होने योग्य दुर्ग और उत्तम रक्षा के उपायों के रक्षक, ( ऋतस्य ) सत्य ज्ञान के ( दीदिविम्) प्रकाशक, (स्वे दमे ) अपने दमन कार्य में (वर्धमानं)सबसे अधिक बढ़ने वाले तुम राजा को हम अन्न का उपहार करते हुए प्राप्त हों । 
ईश्वर पक्ष में  -- यज्ञों के रक्षक ऋग्वेद के प्रकाशक, परम मोक्षपद में राजमान, परमेश्वर की हम उपासना करें । 
अग्नि के पक्ष में -- इसी प्रकार प्रकाश या अग्नि को हम अपने घर में हवि सेपुष्ट करें || शत० २ । ३ । ४ । २७ ॥
 
Subject
ईश्वर और राजा का स्वरूप ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
 वैश्वामित्रोमधुच्छन्दा ऋषिः ! अग्निर्देवता । गायत्री । षड्जः ॥