Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 3 / Mantra 13

63 Mantra
3/13
Devata- इन्द्राग्नी देवते Rishi- भरद्वाज ऋषिः Chhand- विराट् त्रिष्टुप्, Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ॒भा वा॑मिन्द्राग्नीऽआहु॒वध्या॑ऽउ॒भा राध॑सः स॒ह मा॑द॒यध्यै॑। उ॒भा दा॒तारा॑वि॒षा र॑यी॒णामु॒भा वाज॑स्य सा॒तये॑ हुवे वाम्॥१३॥

उ॒भा। वा॒म्। इ॒न्द्रा॒ग्नी॒ऽइती॑न्द्राग्नी। आ॒हु॒वध्या॒ऽइत्या॑ऽहु॒वध्यै॑। उ॒भा। राध॑सः। स॒ह। मा॒द॒यध्यै॑। उ॒भा। दा॒तारौ॑। इ॒षाम्। र॒यी॒णाम्। उ॒भा। वाज॑स्य। सा॒तये॑। हु॒वे। वा॒म् ॥१३॥

Mantra without Swara
उभा वामिन्द्राग्नीऽआहुवध्याऽउभा राधसः सह मादयध्यै । उभा दाताराविषाँ रयीणामुभा वाजस्य सातये हुवे वाम् ॥

उभा। वाम्। इन्द्राग्नीऽइतीन्द्राग्नी। आहुवध्याऽइत्याऽहुवध्यै। उभा। राधसः। सह। मादयध्यै। उभा। दातारौ। इषाम्। रयीणाम्। उभा। वाजस्य। सातये। हुवे। वाम्॥१३॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
-हे ( इन्द्र-अग्नी ) इन्द्र और अग्ने ! हे (इन्द्र) ऐश्वर्यवन् राजन् ! हे (अग्ने) शत्रुसंतापक अग्ने !अग्रणी ! सेना नायक ! (वाम् उभा ) तुम दोनों को ( आहुवध्यै ) अपने पास बुलाने के लिये और ( उभा ) दोनों को ( राधसः ) नाना ऐश्वर्य के द्वारा ( सह ) एकत्र ( मादयध्यै ) आनन्द लाभ करने के लिये ( हुवे ) मैं बुलाता हूं। ( उभा ) तुम दोनों (इषाम्) अन्नों और ( रयीणाम् ) ऐश्वर्यो के ( दातारौ ) प्रदान करने वाले हैं । ( उभौ आप दोनों को ( वाजस्य ) उत्तम अन्न के ( सातये ) प्राप्ति और भोग के लिये ( वाम् ) तुम दोनों के ( हुवे ) बुलाता हूं। दोनों को आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं । विद्युत् अग्नि के पक्ष में- परस्पर के बुलाने, वार्तालाप, दूरस्थ देश से सन्देश आदि देने और धनैश्वर्य के परस्पर मिलकर भोग करने के लिये समस्त कामनाओं और ऐश्वर्यों के प्रदाता वीर्यवान्, या बलयुक्त कार्यों की सिद्धि के लिये अग्नि और विद्युत् शक्तियों को मैं ( हुवे ) स्वयं अपने वश करता हूं ॥ शत० २ | ३ | ४ | १२ ॥ अथवा, इन्द्र = सूर्य और अग्नि ॥ 
Subject
विद्युत् अग्नि तथा राजा और सेना नायक दोनों का वर्णन।
Footenote
१३ – ० दातारा इषां' इति काण्व० । 
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
भरद्वाज ऋषिः । इन्द्राग्नी देवते । स्वराट् त्रिष्टुप् । धैवतः ॥