Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 3 / Mantra 10

63 Mantra
3/10
Devata- पूर्वार्द्धस्याग्निरुत्तरार्द्धस्य सूर्यश्च देवते Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- गायत्री,भूरिक् गायत्री, Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स॒जूर्दे॒वेन॑ सवि॒त्रा स॒जू रात्र्येन्द्र॑वत्या। जु॒षा॒णोऽअ॒ग्निर्वे॑तु॒ स्वाहा॑। स॒जूर्दे॒वेन॑ सवि॒त्रा स॒जूरु॒षसेन्द्र॑वत्या। जु॒षा॒णः सूर्यो॑ वेतु॒ स्वाहा॑॥१०॥

स॒जूरिति॑ स॒ऽजूः। दे॒वेन॑। स॒वि॒त्रा। स॒जूरिति॑ स॒ऽजूः। रात्र्या॑। इन्द्र॑व॒त्येतीन्द्र॑ऽवत्या। जु॒षा॒णः। अ॒ग्निः। वे॒तु॒। स्वाहा॑। स॒जूरिति॑ स॒ऽजूः। दे॒वेन॑। स॒वि॒त्रा। स॒जूरिति॑ स॒ऽजूः। उ॒षसा। इन्द्र॑व॒त्येतीन्द्र॑ऽवत्या। जु॒षा॒णः। सूर्यः॑। वे॒तु॒। स्वाहा॑ ॥१०॥

Mantra without Swara
सजूर्देवेन सवित्रा सजू रात्र्येन्द्रवत्या । जुषाणो अग्निर्वेतु स्वाहा । सजूर्देवेन सवित्रा सजूरुषसेन्द्रवत्या । जुषाणः सूर्यो वेतु स्वाहा ॥

सजूरिति सऽजूः। देवेन। सवित्रा। सजूरिति सऽजूः। रात्र्या। इन्द्रवत्येतीन्द्रऽवत्या। जुषाणः। अग्निः। वेतु। स्वाहा। सजूरिति सऽजूः। देवेन। सवित्रा। सजूरिति सऽजूः। उषसा। इन्द्रवत्येतीन्द्रऽवत्या। जुषाणः। सूर्यः। वेतु। स्वाहा॥१०॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( अग्निः ) यह भौतिक अग्नि जिस प्रकार ( देवेन सवित्रा ) सर्व प्रकाशक, सर्व व्यवहारप्रवर्तक, सर्वोत्पादक परमेश्वर के बल से (सजूः) सब पदार्थों को समान भाव से सेवन करता है । (इन्द्रवत्या) इन्द्र, वायु से युक्त ( रात्र्या ) रात्रि या आदानकारिणी शक्ति से युक्त होकर ( सजूः ) समस्त पदार्थों को समान रूप से अपने भीतर लीन करता है, उसी प्रकार ( अग्निः ) प्रकाशक अग्नि, सर्वेश्वर परमात्मा (जुषाणः ) सबको प्रेम करता हुआ या सबको सेचन करता हुआ ( अग्निः ) भौतिक अग्नि के समान ही. परमेश्वर ( स्वाहा ) अपनी महिमा या महत्व शक्ति से ( वेतु ) सर्वत्र व्याप्त है और (देवेन) सर्व प्रकाशक ( सवित्रा ) सर्वोत्पादक परमेश्वर के बल से सूर्य ( सजू : ) सर्वत्र समान भाव से व्याप्त होता है और वही (इन्द्रवत्या ) प्रकाशमय ( उषसा ) उषा या प्रभा के साथ ( सजूः ) समान भाव से व्याप्त होता है, उसी प्रकार ( सूर्यः ) सर्व प्रेरक परमेश्वर सबको ( जुषाणः ) प्रेम करता हुआ ( स्वाहा ) अपनी महान् शक्ति से सर्वत्र ( वेतु ) व्यापक है, सबको अपने भीतर लिये है | 
अग्निहोत्र पक्ष में देव सविता परमेश्वर की उत्पादित सृष्टि के साथ मिल कर और इन्द्रवती रात्रि अर्थात् विद्युत् शक्ति से युक्त रात्रि से मिल कर हवि आदि को अग्नि अपने भीतर ले । इसी प्रकार ईश्वरीय शक्ति से युक्त और प्रकाश युक्त उषा से होकर सूर्य चरुद्रव्यों को अपने भीतर ले ॥
 
Subject
प्रातः सांय के हवन मन्त्रों में ईश्वरोपासना और भौतिक तत्त्व ।
Footenote
१० - इतः परं मन्त्रचतुष्कं काण्व० पठित परिशिष्टे द्रष्टव्यम्।
१ सजुर्देवेन।  २ सजूर्देवेन।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
प्रजापतिःऋषिः । ( १ ) अग्निः (२) सू्र्यः।( १) गायत्री, (२) भुरिग्गायत्री । षड्जः स्वरः ॥