Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 28 / Mantra 24

46 Mantra
28/24
Devata- अग्निर्देवता Rishi- सरस्वती ऋषिः Chhand- स्वराड् जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
होता॑ यक्षत्समिधा॒नं म॒हद्यशः॒ सुस॑मिद्धं॒ वरे॑ण्यम॒ग्निमिन्द्रं॑ वयो॒धस॑म्।गा॒य॒त्रीं छन्द॑ऽइन्द्रि॒यं त्र्यविं॒ गां वयो॒ दध॒द् वेत्वाज्य॑स्य होत॒र्यज॑॥२४॥

होता॑। य॒क्ष॒त्। स॒मि॒धा॒नमिति॑ सम्ऽइधा॒नम्। म॒हत्। यशः॑। सुस॑मिद्ध॒मिति॒ सुऽस॑मिद्धम्। वरे॑ण्यम्। अ॒ग्निम्। इन्द्र॑म्। व॒यो॒धस॒मिति॑ वयः॒ऽधस॑म्। गा॒य॒त्रीम्। छन्दः॑। इ॒न्द्रि॒यम्। त्र्यवि॒मिति॑ त्रि॒ऽअवि॑म्। गाम्। वयः॑। दध॑त्। वेतु॑। आज्य॑स्य। होतः॑। यज॑ ॥२४ ॥

Mantra without Swara
होता यक्षत्समिधानम्महद्यशः सुसमिद्धँवरेण्यमग्निमिन्द्रँवयोधसम् । गायत्रीञ्छन्दऽइन्द्रियन्त्र्यविङ्गाँवयो दधद्वेत्वाज्यस्य होतर्यज ॥

होता। यक्षत्। समिधानमिति समऽइधानम्। महत्। यशः। सुसमिद्धमिति सुऽसमिद्धम्। वरेण्यम्। अग्निम्। इन्द्रम्। वयोधसमिति वयःऽधसम्। गायत्रीम्। छन्दः। इन्द्रियम्। त्र्यविमिति त्रिऽअविम्। गाम्। वयः। दधत्। वेतु। आज्यस्य। होतः। यज॥२४॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
(होता) अधिकार देने वाला विद्वान् ( सम् इधानम् ) स्वयं अच्छी प्रकार प्रकाशमान, (महत् यशः) बड़े यश से ( सुसमिद्धम् ) उत्तम गुणों से विख्यात, ( वरेण्यम् ) वरण करने योग्य, (अग्निम् ) ज्ञानवान् ( वयोधसम् ) दीर्घ जीवन, बल, ब्रह्मचर्य को धारण करने और कराने वाले, ( इन्द्रम् ) दुष्ट वासनाओं को दूर करने वाले आचार्य अर्थात् २४ वर्ष का ब्रह्मचर्य और पुरुष को ( यक्षत् ) उच्च अधिकार प्रदान करे और वह (गायत्रीं छन्दः) गायत्री छन्द, ( इन्द्रियम् ) इन्द्रोचित आत्मबल व ऐश्वर्य अथवा उत्तम इन्द्रियों में बल, और (व्यविम् ) मन, वाणी और देह तीनों की रक्षा करने वाली साधना को, ( गाम्) वाणी को और ( वयः) वीर्य और दीर्घजीवन को राष्ट्र में ( दधत् ) धारण करावे । और ( आज्यस्य वेतु) राष्ट्र के ऐश्वर्य की रक्षा करे । (होतः यज) हे होत: ! विद्वन् ! तू योग्य पुरुष को यह अधिकार प्रदान कर । अर्थात् राज्य में विद्वान् आचार्यों की स्थापना की जायं । वे गुरुमन्त्र का उपदेश करें । २४ वर्ष का ब्रह्मचर्यं पालन करावें, लोगों में दीर्घजीवन का साधन करें ।
Subject
होता द्वारा भिन्न-भिन्न अधिकारियों की नियुक्ति और उनके विशेष आवश्यक लक्षण, अधिकार और शक्तियों का वर्णन।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
स्वराड् जगती । निषादः ॥