Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 27 / Mantra 19

45 Mantra
27/19
Devata- इडादयो लिङ्गोक्ता देवताः Rishi- अग्निर्ऋषिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ति॒स्रो दे॒वीर्ब॒र्हिरेदꣳ स॑द॒न्त्विडा॒ सर॑स्वती॒ भार॑ती। म॒ही गृ॑णा॒ना॥१९॥

ति॒स्रः। दे॒वीः। ब॒र्हिः। आ। इ॒दम्। स॒द॒न्तु॒। इडा॑। सर॑स्वती। भार॑ती। म॒ही। गृ॒णा॒ना ॥१९ ॥

Mantra without Swara
तिस्रो देवीर्बर्हिरिदँ सदन्त्विडा सरस्वती भारती । मही गृणाना ॥

तिस्रः। देवीः। बर्हिः। आ। इदम्। सदन्तु। इडा। सरस्वती। भारती। मही। गृणाना॥१९॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
(मही) बड़ी, उच्च गुणों वाली, (देवी :) ज्ञान की प्रकाशक, (गृणाना) उत्तम उपायों का उपदेश देती हुई (इडा, सरस्वती, भारती) इडा, सरस्वती और भारती, पृथ्वी, वाणी और तेज को धारण करने -वाली (तिस्रः) तीनों सभाएं (इदं बर्हिः ) इस महान् प्रजा या राष्ट्र पर ( आ सदन्तु ) आकर विराजें, ये तीनों सभाएं शासन करें ।
Subject
अग्नि और वाग्मी नाम विद्वानों का वर्णन ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
अग्निः । भुरिग् गायत्री । षड्जः ॥