Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 25 / Mantra 38

47 Mantra
25/38
Devata- यज्ञो देवता Rishi- गोतम ऋषिः Chhand- विराट् पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
नि॒क्रम॑णं नि॒षद॑नं वि॒वर्त्त॑नं॒ यच्च॒ पड्वी॑श॒मर्व॑तः।यच्च॑ प॒पौ यच्च॑ घा॒सिं ज॒घास॒ सर्वा॒ ता ते॒ऽअपि॑ दे॒वेष्व॑स्तु॥३८॥

नि॒क्रम॑ण॒मिति॑ नि॒ऽक्रम॑णम्। नि॒षद॑नम्। नि॒सद॑नमिति॑ नि॒ऽसद॑नम्। वि॒वर्त्त॑न॒मिति॑ वि॒ऽवर्त्त॑नम्। यत्। च॒। पड्वी॑शम्। अर्व॑तः। यत्। च॒। प॒पौ। यत्। च॒। घा॒सिम्। ज॒घास॑। सर्वा॑। ता। ते॒। अपि॑। दे॒वेषु॑। अ॒स्तु॒ ॥३८ ॥

Mantra without Swara
निक्रमणन्निषदनँविवर्तनँयच्च पड्वीशमर्वतः । यच्च पपौ यच्च घासिञ्जघास सर्वा ता ते अपि देवेष्वस्तु ॥

निक्रमणमिति निऽक्रमणम्। निषदनम्। निसदनमिति निऽसदनम्। विवर्त्तनमिति विऽवर्त्तनम्। यत्। च। पड्वीशम्। अर्वतः। यत्। च। पपौ। यत्। च। घासिम्। जघास। सर्वा। ता। ते। अपि। देवेषु। अस्तु॥३८॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( अर्वतः ) अश्व का जिस प्रकार कदम बढ़ाना, बैठना, लेटना, पैरों का बांधना, जल पीना, घास खाना आदि सब विवेकपूर्वक हो उसी प्रकार (अर्धतः) व्यापक राष्ट्र का भी (निक्रमणम् ) सुरक्षित रूप से निकलने के मार्ग, (निषदनम् ) सुरक्षित रूप से गुप्त बैठने के स्थान, ( यत् च पडवीशम् ) और जो पदाधिकारों पर योग्य पुरुषों का नियुक्त करने का कार्य, ( विवर्त्तनम् ) विविध प्रकार के राजकीय कारबार के स्थान और राष्ट्रवासी जन और अधिकारी राष्ट्रपति आदि के व्यवहार हैं और (यत् च पपौ) जो पदार्थ पान करते और (यत् च घासिं जघास ) जो खाने योग्य पदार्थ खाते हैं (ते) तुझ राष्ट्र और राष्ट्रवासी जन और राष्ट्रपति राजा के (सर्वा ता) वे सब कार्य भी (देवेषु) देव अर्थात् विद्वानों के अधीन (अस्तु) हों ।
Subject
राजा के सब खान-पान विहार आदि पर विद्वानों का निरीक्षण ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
यज्ञः । भुरिक् पंक्तिः । पंचमः ॥