Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 24 / Mantra 31

40 Mantra
24/31
Devata- प्रजापत्यादयो देवताः Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- स्वराट् त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
म॒युः प्रा॑जाप॒त्यऽउ॒लो ह॒लिक्ष्णो॑ वृषद॒ꣳशस्ते धा॒त्रे दि॒शां क॒ङ्को धुङ्क्षा॑ग्ने॒यी क॑ल॒विङ्को॑ लोहिता॒हिः पु॑ष्करसा॒दस्ते त्वा॒ष्ट्रा वा॒चे क्रुञ्चः॑॥३१॥

म॒युः। प्रा॒जा॒प॒त्यऽइति॑ प्राजाऽप॒त्यः। उ॒लः। ह॒लिक्ष्णः॑। वृ॒ष॒द॒ꣳशऽइति॑ वृषऽद॒ꣳशः। ते। धा॒त्रे। दि॒शाम्। क॒ङ्कः धुङ्क्षा॑। आ॒ग्ने॒यी। क॒ल॒विङ्कः॑। लो॒हि॒ता॒हिरिति॑ लोहितऽअ॒हिः। पु॒ष्क॒र॒सा॒दऽइति॑ पुष्करऽसा॒दः। ते। त्वा॒ष्ट्राः। वा॒चे। क्रुञ्चः॑ ॥३१ ॥

Mantra without Swara
मयुः प्राजापत्यऽउलो हलिक्ष्णो वृषदँशस्ते धात्रे दिशाङ्कङ्को धुङ्क्षाग्नेयी कलविङ्को लोहिताहिः पुष्करसादस्ते त्वाष्ट्रा वाचे क्रुञ्चः ॥

मयुः। प्राजापत्यऽइति प्राजाऽपत्यः। उलः। हलिक्ष्णः। वृषदꣳशऽइति वृषऽदꣳशः। ते। धात्रे। दिशाम्। कङ्कः धुङ्क्षा। आग्नेयी। कलविङ्कः। लोहिताहिरिति लोहितऽअहिः। पुष्करसादऽइति पुष्करऽसादः। ते। त्वाष्ट्राः। वाचे। क्रुञ्चः॥३१॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
(मयुः) उत्तम आज्ञा देने वाला पुरुष ( प्राजापत्य) प्रजापति, प्रजापालक राजपद के योग्य है । अथवा (मयुः) उत्तम गान करने हारा ( प्राजापत्याः) प्रजापति, राजा के सुख के लिये हो । (उलः) ऊन के वस्त्र देने वाला, (हलिक्ष्ण:) सिंह के समान निर्भय चक्षु वाला और (वृपदंश:) तीक्ष्ण प्रकृति वाला विडाल या वृषभ के समान हृष्ट-पुष्ट दिखाई देने वाला (ते) ये तीनों प्रकार के पुरुष (धात्रे) राष्ट्र में धाता, प्रजा के पोषणकारी पद के योग्य हैं । (धुङ्क्षा) शत्रुओं को धुन डालने या कंपा देने वाली और उसको क्षीण करने वाली पक्षिणी के तुल्य सेना (आग्नेयी) 'अग्नि' नामक अग्रणी नायक के अधीन रहे । (कवविङ्कः) मधुरध्वनियों, या कला-यन्त्रों को प्रकट करने वाला, ( लोहिताहिः) लोहित अर्थात् लोहादि के बने पदार्थों को आघात करने वाला लोहकार और (पुष्करसादः) तालाब बनाने वाला, अथवा पुष्ट करने वाले वा दृढ़ दुर्गों को बनाने वाला (ते) ये सब (त्वाष्ट्राः) शिल्पकार विभाग के अधीन हों । कलविंक नामक पक्षी, लालसर्प और पुष्करसाद (बीवर) नाम का जन्तु स्वभावत: गृहादि निर्माण में चतुर हैं । वे स्वष्टा देवता के हैं, (वाचे क्रुञ्चः) मधुर उत्तम वाणी के लिये ज्ञानवान् मधुरभाषी पुरुष प्राप्त हों ।
Subject
भिन्न-भिन्न गुणों और विशेष हुनरों के लिये भिन्न-भिन्न प्रकार के नाना पक्षियों और जानवरों के चरित्रों का अध्ययन और संग्रह ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
प्रजापत्यादयः । स्वराट् त्रिष्टुप् । धैवतः ॥