Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 23 / Mantra 35

65 Mantra
23/35
Devata- प्रजा देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- भुरिगुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
म॒हाना॑म्न्यो रे॒वत्यो॒ विश्वा॒ आशाः॑ प्र॒भूव॑रीः।मैघी॑र्वि॒द्युतो॒ वाचः॑ सू॒चीभिः॑ शम्यन्तु त्वा॥३५॥

म॒हाना॑म्न्य॒ इति॑ म॒हाऽना॑म्न्यः। रे॒वत्यः॑। विश्वाः॑। आशाः॑। प्र॒भूव॒रीरिति॑ प्र॒ऽभूव॑रीः। मैघीः॑। वि॒द्युत॒ इति॑ वि॒द्युऽतः॑। वाचः॑। सू॒चीभिः॑। श॒म्य॒न्तु॒। त्वा॒ ॥३५ ॥

Mantra without Swara
महानाम्न्यो रेवत्यो विश्वाऽआशाः प्रभूवरीः । मैघीर्विद्युतो वाचः सूचीभिः शम्यन्तु त्वा ॥

महानाम्न्य इति महाऽनाम्न्यः। रेवत्यः। विश्वाः। आशाः। प्रभूवरीरिति प्रऽभूवरीः। मैघीः। विद्युत इति विद्युऽतः। वाचः। सूचीभिः। शम्यन्तु। त्वा॥३५॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
(महानाम्न्यः) 'महानाम्नी' नामक वेदवाणियां, ( रेवत्यः ) रेवती नामक ऋचाएं और ( विश्वाः आशाः ) समस्त 'आशा' शब्दवाली ऋचाएं, ( प्रभुवरी: ) 'प्रभु' शब्दवाली, (मैघी: ) मेघ सम्बन्धी ऋचाएं, ये सब (वाचः) वाणियां (सूचीभि:) अपनी ज्ञानसूचक शैलियों से (त्वा शम्यन्तु ) तुझे शान्ति प्रदान करें। ऊपर की तीनों ऋचाएं वाणियों के साथ २ प्रजाओं का भी वर्णन करती हैं। जैसे- ( गायत्री ) ब्राह्मण वर्ग, (त्रिष्टुप्) क्षत्रिय वर्ग, (जगती) वैश्य वर्ग, (अनुष्टुप्) भृत्य वर्ग, (पंक्ति) पञ्चजन, (बृहती ) बड़े राष्ट्र की जनपदवासिनी या बड़ी शक्तिवाली, ( उष्णिहा ) सबके प्रेमी, ( ककुप् ) सर्वश्रेष्ठ पुरुष ये अपनी ज्ञानसूचक वाणियों से हृदय को शान्त करें ।
(२) (महानाम्न्यः ) बड़ी यशस्विनी, ( रेवत्याः ) धन धान्य सम्पन्न, (विश्वाः आशाः) समस्त दिशाओं में बसी, ( प्रभूवरी:) प्रभूत, बल और धन सामर्थ्य वाली, (मैघी:) मेघ के समान सब पर सुख वर्षण करनेवाले ज्ञानोपदेशक वर्ग, (विद्यतः) विद्युत के समान प्रकाश देने वाले शिल्पिवर्ग, (वाचः) वेद वाणियों के वक्ताजन ज्ञानसाधनों से तुझे (शम्यन्तु) शान्ति दें।
Subject
द्विपदा आदि और महानाम्नी आदि वेदवाणियों से स्वामी का शान्तिकरण । इसी प्रकार गायत्री, द्विपदा महानाम्नी आदि भिन्न-भिन्न प्रजाओं का वर्णन ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
वाचः प्रजाः देवताः । भूरिगुष्णिक् । ऋषभः ॥