Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 21 / Mantra 19

61 Mantra
21/19
Devata- विश्वेदेवा देवताः Rishi- स्वस्त्यात्रेय ऋषिः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ति॒स्रऽइडा॒ सर॑स्वती॒ भार॑ती म॒रुतो॒ विशः॑।वि॒राट् छन्द॑ऽइ॒हेन्द्रि॒यं धे॒नुर्गौर्न वयो॑ दधुः॥१९॥

ति॒स्रः। इडा॑। सर॑स्वती। भार॑ती। म॒रुतः॑। विशः॑। वि॒राडिति॑ वि॒ऽराट्। छन्दः॑। इ॒ह। इ॒न्द्रि॒यम्। धे॒नुः। गौः। न। वयः॑। द॒धुः॒ ॥१९ ॥

Mantra without Swara
तिस्रऽइडा सरस्वती भारती मरुतो विशः । विराट्छन्दऽइहेन्द्रियन्धेनुर्गौर्न वयो दधुः ॥

तिस्रः। इडा। सरस्वती। भारती। मरुतः। विशः। विराडिति विऽराट्। छन्दः। इह। इन्द्रियम्। धेनुः। गौः। न। वयः। दधुः॥१९॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
(इडा, सरस्वती, भारती) इडा, सरस्वती और भारती नामक (तिस्रः) तीन समितियां और (मरुतः) वायुओं के समान तीव्र वेग वाली या देशदेशान्तर में गमन करने वाली, शत्रुमारक वीर सेना रूप (विशः) प्रजाएं और (विराट् छन्दः) ४० अक्षरों के विराट् छन्द के अनुसार ४० वर्षों का अक्षत ' ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला पुरुष और (धेनुः गौः)दुधार गौ ये सब राष्ट्र में ( इन्द्रियम् ) राजा के ऐश्वर्यं और (वय: ) दीर्घ जीवन को धारण करते हैं वे राष्ट्र में भी धारण करावें ।
Subject
आप्री देवों का वर्णन । अग्नि, तनृनपात्, सोम बहिः, द्वार, उषासानक्ता, दैव्य होता, इडा आदि तीन देवियां, त्वष्टा, वनस्पति, वरण इन पदाधिकारों के कर्त्तव्य बल और आवश्यक सदाचार । तपः सामर्थ्य का वर्णन ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
अनुष्टुप् । गान्धारः ॥