Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 80

95 Mantra
19/80
Devata- सविता देवता Rishi- शङ्ख ऋषिः Chhand- भुरिक् त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सीसे॑न॒ तन्त्रं॒ मन॑सा मनी॒षिण॑ऽऊर्णासू॒त्रेण॑ क॒वयो॑ वयन्ति। अ॒श्विना॑ य॒ज्ञꣳ स॑वि॒ता सर॑स्व॒तीन्द्र॑स्य रू॒पं वरु॑णो भिष॒ज्यन्॥८०॥

सीसे॑न। तन्त्र॑म्। मन॑सा। म॒नी॒षिणः॑। ऊ॒र्णा॒सू॒त्रेणेत्यू॑र्णाऽसू॒त्रेण॑। क॒वयः॑। व॒य॒न्ति॒। अ॒श्विना॑। य॒ज्ञम्। स॒वि॒ता। सर॑स्वती। इन्द्र॑स्य। रू॒पम्। वरु॑णः। भि॒ष॒ज्यन् ॥८० ॥

Mantra without Swara
सीसेन तन्त्रम्मनसा मनीषिणाऽऊर्णासूत्रेण कवयो वयन्ति । अश्विना यज्ञँ सविता सरस्वतीन्द्रस्य रूपँवरुणो भिषज्यन् ॥

सीसेन। तन्त्रम्। मनसा। मनीषिणः। ऊर्णासूत्रेणेत्यूर्णाऽसूत्रेण। कवयः। वयन्ति। अश्विना। यज्ञम्। सविता। सरस्वती। इन्द्रस्य। रूपम्। वरुणः। भिषज्यन्॥८०॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( कवयः) क्रान्तदर्शी ( मनीषिणः) बुद्धिमान्, विद्वान् पुरुष जिस प्रकार (सीलेन) सीसे के बल पर ( तन्त्रम् ) राष्ट्र की (वयन्ति ) वृद्धि करते हैं अर्थात् सीसे की गोलियों से दुष्ट शत्रुओं का संहार करके राष्ट्र को बढ़ाते हैं और जिस प्रकार वे (मनसा) मन से, आत्मचिन्तन से ( तन्त्रम् ) अति विस्तृत शास्त्र सिद्धान्त को ( वयन्ति ) ऊहापोह द्वारा विस्तृत व्याख्या करते हैं और जिस प्रकार (ऊर्णासूत्रेण) ऊन और अन्य कोमल सूत्रमय पदार्थों के सूत से उसके समान (तन्त्रम् ) तन्तु से तने सूत्रजाल को विस्तृत पटरूप में ( वयन्ति) बुनते हैं उसी प्रकार (अश्विनौ) राष्ट्र के स्त्री-पुरुष, (सविता) आज्ञापक, सूर्य के समान विद्वान् पुरुष और (सरस्वती) ज्ञानी वेदज्ञ और (वरुणः) शत्रुओं को वारण करने में समर्थ सेनापति ये सब मिलकर (इन्द्रस्य) ऐश्वर्यवान् राजा के ( रूपम् ) उज्ज्वल कान्तिमान् रूप को ( भिषज्यन् ) शरीर के समान पीड़ा और बाधाओं से रहित, निष्कण्टक करते हुए (तन्त्रम्) राष्ट्र का ( वयन्ति ) विस्तार करते हैं ।
Subject
सीसे से शत्रुनाश करने और सूत्र से कपड़ा बुनने के दृष्टान्त से निर्बल राष्ट्र की वृद्धि का उपदेश ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
अश्व्यादयः । सविता सरस्वती वरुणश्च देवताः । भुरिक् त्रिष्टुप् । धैवतः ॥