Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 28

95 Mantra
19/28
Devata- यज्ञो देवता Rishi- हैमवर्चिर्ऋषिः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
यजु॑र्भिराप्यन्ते॒ ग्रहा॒ ग्रहै॒ स्तोमा॑श्च॒ विष्टु॑तीः। छन्दो॑भिरुक्थाश॒स्त्राणि॒ साम्ना॑वभृ॒थऽआ॑प्यते॥२८॥

यजु॑र्भिरिति॒ यजुः॑ऽभिः। आ॒प्य॒न्ते॒। ग्रहाः॑। ग्रहैः॑। स्तोमाः॑। च॒। विष्टु॑तीः। विस्तु॑तीरिति॒ विऽस्तु॑तीः। छन्दो॑भि॒रिति॒ छन्दः॑ऽभिः। उ॒क्था॒श॒स्त्राणि॑। उ॒क्थ॒श॒स्त्राणीत्यु॑क्थऽश॒स्त्राणि॑। साम्ना॑। अ॒व॒भृ॒थ इत्य॑वऽभृ॒थः। आ॒प्य॒ते॒ ॥२८ ॥

Mantra without Swara
यजुर्व्हिराप्यन्ते ग्रहा ग्रहै स्तोमाश्च विष्टुतीः । छन्दोभिरुक्थाशस्त्राणि साम्नावभृथऽआप्यते ॥

यजुर्भिरिति यजुःऽभिः। आप्यन्ते। ग्रहः। ग्रहैः। स्तोमाः। च। विष्टुतीः। विस्तुतीरिति विऽस्तुतीः। छन्दोभिरिति छन्दःऽभिः। उक्थाशस्त्राणि। उक्थशस्त्राणीत्युक्थऽशस्त्राणि। साम्ना। अवभृथ इत्यवऽभृथः। आप्यते॥२८॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
(यजुर्भिः [ यजूंषि ] आप्यन्ते) यजुओं से यजुओं की तुलना है (ग्रहा ग्रहैः) ग्रहों से ग्रहों की, (स्तोमाः [स्तोमैः ] ) स्तोमों से स्तोमों की और ( [ विष्टुतिभिः] च विष्टुती: ) विविध स्तुतियों से विविध स्तुतियों की और (छन्दोभिः छन्दांसि ) छन्दों से छन्दों की (उक्थशस्त्रैः उक्थशस्त्राणि) उक्थ शस्त्रों से उक्थ शस्त्रों की, (साम्ना [ साम, अवभृथेन] अवभृथः ) साम गायन से साम गान की और अवभृथ स्नान की तुलना है । अर्थात् सौत्रामणि के ये अंश अन्य यज्ञों के उन अंशों के तुल्य हैं। राष्ट्रपक्ष में- जैसे यज्ञ में यजुर्वाक्य हैं उसी प्रकार राष्ट्र में ( यजुः ) व्यवस्थाकारक आज्ञा और नियम हैं । यज्ञ में 'ग्रह' होम हैं राष्ट्र में (ग्रहाः ) अंग प्रत्यंग, अधिकार विभाग हैं। यज्ञ में 'स्तोम' हैं राष्ट्र में, स्तुतियोग्य अधिकारपद हैं । यज्ञ में 'विष्टुति' ऋचाएं हैं राष्ट्र में योग्य पुरुषों की स्तुतियां हैं । यज्ञ मैं छन्द हैं राष्ट्र में अधिकार, कार्य-विभाग हैं। यज्ञ में 'उक्थशस्त्र' हैं
राष्ट्र में वीर्यानुसार शस्त्र धारण हैं। यज्ञ में 'साम' हैं राष्ट्र में साम आदि उपाय हैं । यज्ञ में 'अवभृथस्नान' है राष्ट्र में प्रजा व भृत्यों के भरण- पोषण का कर्त्तव्य है ।
Subject
राजा का बल-सम्पादन । राष्ट्रयज्ञ का विस्तार ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
यज्ञः । अनुष्टुप् । गांधारः ॥