Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 24

95 Mantra
19/24
Devata- विद्वान् देवता Rishi- हैमवर्चिर्ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आ श्रा॑व॒येति॑ स्तो॒त्रियाः॑ प्रत्याश्रा॒वोऽअनु॑रूपः। यजेति॑ धाय्यारू॒पं प्र॑गा॒था ये॑यजाम॒हाः॥२४॥

आ। श्रा॒व॒य॒ इति॑। स्तो॒त्रियाः॑। प्र॒त्या॒श्रा॒व इति॑ प्रतिऽआश्रा॒वः। अनु॑रूप॒ इत्यनु॑ऽरूपः। यजा॒इति॑। धा॒य्या॒रू॒पमिति॑ धाय्याऽरू॒पम्। प्र॒गा॒था इति॑ प्रऽगा॒थाः। ये॒य॒जा॒म॒हा इति॑ येऽयजाम॒हाः ॥२४ ॥

Mantra without Swara
आ श्रावयेति स्तोत्रियाः प्रत्याश्रावोऽअनुरूपः । यजेति धय्यारूपम्प्रगाथा येयजामहाः ॥

आ। श्रावय इति। स्तोत्रियाः। प्रत्याश्राव इति प्रतिऽआश्रावः। अनुरूप इत्यनुऽरूपः। यजाइति। धाय्यारूपमिति धाय्याऽरूपम्। प्रगाथा इति प्रऽगाथाः। येयजामहा इति येऽयजामहाः॥२४॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( 'आ श्रावय' इति स्तोत्रियाः ) 'आ श्रावय' इस प्रकार कहना यज्ञ में 'स्तोत्रिय' अर्थात् प्रथम तीन ऋचाओं के पाठ के समान है । राष्ट्रपक्ष में - ( स्तोत्रिया:) विद्वान्, सत्यासत्य विवेकयुक्त विद्याओं के योग्य विद्यार्थी (आ श्रावय) 'हे गुरो सब विद्याओं को श्रवण कराओ' (इति) इस प्रकार प्रार्थना करें ।
( प्रत्याश्रावो अनुरूपः) यज्ञ में प्रत्याश्राव 'अस्तु, श्रौषट' इस प्रकार कहना अनुरूप अर्थात् अन्त की तीन ऋचाओं के पाठ करने के समान है । इस प्रकार 'ब्रह्मयज्ञ' की यज्ञरूपता बतलाई है । राष्ट्रपक्ष में ( प्रत्याश्राव:) विद्यार्थियों के प्रति विद्याओं का उपदेश ( अनुरूप : ) उनके योग्यता के अनुरूप हो ।
( यज इति धाय्यारूपम् ) 'यज' इस प्रकार कहना 'धाय्या' नाम ऋचा के पठन के समान है । राष्ट्रपक्ष में- (यज इति) 'प्रदान कर' इस प्रकार आदर से कहना (धाय्यारूपम् ) धारण या ग्रहण कहने योग्य पदार्थ का उत्तम रूप है ।
(प्रगाथाः ये यजामहाः) 'ये यजामहे' इत्यादि शब्द प्रगाथा ऋचाओं के पाठ के समान हैं । राष्ट्रपक्ष में- (ये) हम लोग (यजामहाः) यज्ञ दान आदि करते हैं, श्रेष्ठ आचारवान् हैं वे (प्रगाथाः) उत्तम स्तुति योग्य हैं ।
Subject
राजा का बल-सम्पादन । राष्ट्रयज्ञ का विस्तार ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
विद्वान् । निचृदनुष्टुप् । गान्धारः ॥