Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 18

95 Mantra
19/18
Devata- गृहपतिर्देवता Rishi- हैमवर्चिर्ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ह॒वि॒र्धानं॒ यद॒श्विनाग्नी॑ध्रं॒ यत्सर॑स्वती। इन्द्रा॑यै॒न्द्रꣳसद॑स्कृ॒तं प॑त्नी॒शालं॒ गार्ह॑पत्यः॥१८॥

ह॒वि॒र्धान॒मिति॑ हविः॒ऽधान॑म्। यत्। अ॒श्विना॑। आग्नी॑ध्रम्। यत्। सर॑स्वती। इन्द्रा॑य। ऐ॒न्द्रम्। सदः॑। कृ॒तम्। प॒त्नी॒शाल॒मिति॑ पत्नी॒ऽशाल॑म्। गार्ह॑पत्य॒ इति॒ गार्ह॑ऽपत्यः ॥१८ ॥

Mantra without Swara
हविर्धानँयदश्विनाग्नीध्रँयत्सरस्वती । इन्द्रायैन्द्रँ सदस्कृतम्पत्नीशालङ्गार्हपत्यः ॥

हविर्धानमिति हविःऽधानम्। यत्। अश्विना। आग्नीध्रम्। यत्। सरस्वती। इन्द्राय। ऐन्द्रम्। सदः। कृतम्। पत्नीशालमिति पत्नीऽशालम्। गार्हपत्य इति गार्हऽपत्यः॥१८॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
१८. राष्ट्र के (अश्विनौ) स्त्री-पुरुषगण ( हविर्धानम् ) अन्नों के रखने वाले यज्ञ में ग्राह्य हविष्य-पदार्थों के रखने वाले शकट के समान हैं ।
१९. ( यत् सरस्वती ) जो सरस्वती, विज्ञान का उपदेश करने का कार्य है वह यज्ञ में ( आग्नीधम् ) 'अग्नीध' नामक अग्नि की देख-रेख करनेवाले ऋत्विक् के पद के समान है ।
२०. ( इन्द्राय ) इन्द्र अर्थात् ऐश्वर्यवान् राजा के लिये ( ऐन्द्रम् ) इन्द्रोचित ऐश्वर्यं ( कृतम् ) किया जाता है वह यज्ञ में ( ऐन्द्रं सदः ) ऐन्द्र सद्स् - राजा की राजसभा के समान है ।
२१. इसी प्रकार - ( ऐन्द्रं पत्नीशालम् ) पालन करने वाली राजा की राजसभा का भवन यज्ञ में पत्नीशाला के समान है 1
२२. (ऐन्द्रं गार्हपत्यः ) राजा का राज्य में गृहपति के समान रहना ही यज्ञ में 'गार्हपत्य' अग्नि स्थापन के समान है । इस प्रकार महान् राज्यैश्वर्य पद भी एक धार्मिक गृहस्थ के तुल्य है ।
Subject
राजा का बल-सम्पादन । राष्ट्रयज्ञ का विस्तार ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
गृहपतिः । निचृद् अनुष्टुप् । गान्धारः ॥