Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 18 / Mantra 4

77 Mantra
18/4
Devata- प्रजापतिर्देवता Rishi- देवा ऋषयः Chhand- निचृदत्यष्टिः Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ज्यैष्ठ्यं॑ च म॒ऽआधि॑पत्यं च मे म॒न्युश्च॑ मे॒ भाम॑श्च॒ मेऽम॑श्च॒ मेऽम्भ॑श्च मे जे॒मा च॑ मे महि॒मा च॑ मे वरि॒मा च॑ मे प्रथि॒मा च॑ मे वर्षि॒मा च॑ मे द्राधि॒मा च॑ मे वृ॒द्धं च॑ मे॒ वृद्धि॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्॥४॥

ज्यैष्ठ्य॑म्। च॒। मे॒। आधि॑पत्य॒मित्याधि॑ऽपत्यम्। च॒। मे॒। म॒न्युः। च॒। मे॒। भामः॑। च॒। मे॒। अमः॑। च॒। मे॒। अम्भः॑। च॒। मे॒। जे॒मा। च॒। मे॒। म॒हि॒मा। च॒। मे॒। व॒रि॒मा। च॒। मे॒। प्र॒थि॒मा। च॒। मे॒। व॒र्षि॒मा। च॒। मे॒। द्रा॒घि॒मा। च॒। मे॒। वृ॒द्धम्। च॒। मे॒। वृद्धिः॑। च॒। मे॒। य॒ज्ञेन॑। क॒ल्प॒न्ता॒म् ॥४ ॥

Mantra without Swara
ज्यैष्ठ्यञ्च मेऽआधिपत्यञ्च मे मन्युश्च मे भामश्च मे मश्च मे म्भश्च मे महिमा च मे वरिमा च मे प्रथिमा च मे वर्षिमा च मे द्राघिमा च मे वृद्धञ्च मे वृद्धिश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम् ॥

ज्यैष्ठ्यम्। च। मे। आधिपत्यमित्याधिऽपत्यम्। च। मे। मन्युः। च। मे। भामः। च। मे। अमः। च। मे। अम्भः। च। मे। जेमा। च। मे। महिमा। च। मे। वरिमा। च। मे। प्रथिमा। च। मे। वर्षिमा। च। मे। द्राघिमा। च। मे। वृद्धम्। च। मे। वृद्धिः। च। मे। यज्ञेन। कल्पन्ताम्॥४॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( मे ) मुझे ( ज्येष्ठयं च ) ज्येष्ठता, बड़ाई, ( आधिपत्यं च ) अधिपाद का पद, (मन्युः च) मन्यु, मानस, कोप, ज्ञान और आत्म- मान, ( भाम: च ) क्रोध, दुष्टों पर असहनशीलता, ( अम: च ) न्यायोचित प्राप्त गृह आदि पदार्थ ( अम्भः च ) जल, उसके समान शीतलता और समुद्र के समान गम्भीरता, (जेमा च ) विजय और ऐश्वर्य, ( महिमा च ) महत्त्व, (बरिमा च ) श्रेष्ठता, ( प्रथिमा च ) विस्तृत गृह, क्षेत्र, राज्य आदि, (वर्षिमा च ) ज्ञान, अनुभव, आयु और पद की वृद्धि, ( द्वाघिमा च ) दीर्घता, अर्थपरम्परा, ( वृद्धं च ) बढ़ा हुआ बल और धन, ( वृद्धिः च) विद्या आदि गुणों की उन्नति, बढ़ोतरी, ये समस्त पदार्थ मेरे ( यज्ञेन कल्पन्ताम् ) परमेश्वर की कृपा और सत्कर्म रूप यज्ञ से मुझे प्राप्त हों ।
Subject
यज्ञ से बड़ाई, उच्च पद, तेज, सहयोग, न्याय, उत्तम गुण, विजय, बड़प्पन, कीर्ति, वृद्धि आदि की प्राप्ति ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
निचृदत्यष्टिः । गान्धारः ॥