Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 17 / Mantra 81

98 Mantra
17/81
Devata- मरुतो देवताः Rishi- सप्तऋषय ऋषयः Chhand- आर्षी गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ई॒दृङ् चा॑न्या॒दृङ् च॑ स॒दृङ् च॒ प्रति॑सदृङ् च। मि॒तश्च॒ सम्मि॑तश्च॒ सभ॑राः॥८१॥

ई॒दृङ्। च॒। अ॒न्या॒दृङ्। च॒। स॒दृङ्। स॒दृङिति॑ स॒ऽदृङ्। च॒। प्रति॑सदृ॒ङ्ङिति॒ प्रति॑ऽसदृङ्। च॒। मि॒तः। च॒। सम्मि॑त॒ इति॒ सम्ऽमि॑तः। च॒। सभ॑रा॒ इति॒ सऽभ॑राः ॥८१ ॥

Mantra without Swara
ईदृङ्चान्यदृङ्च सदृङ्च प्रतिसदृङ्च । मितश्च सम्मितश्च सभराः ॥

ईदृङ्। च। अन्यादृङ्। च। सदृङ्। सदृङिति सऽदृङ्। च। प्रतिसदृङ्ङिति प्रतिऽसदृङ्। च। मितः। च। सम्मित इति सम्ऽमितः। च। सभरा इति सऽभराः॥८१॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( इदृङ् ) यह ऐसा है, ( अन्यादृङ् च ) यह अन्य के समान है अर्थात् इसके समान और भी हैं, ( सदृङ् च ) यह और यह समान है । ( प्रतिसदृङ् च ) प्रत्येक पदार्थ इस अंश में समान है ( मित: च ) यह इतने परिमाण का है, ( समितः च) अच्छी प्रकार यह अमुक पदार्थ के बराबर ही परिमाण वाला है। ( सभराः ) ये सब पदार्थ समान भार वाले या समान वस्तु को धारण करते हैं। इस प्रकार सातों प्रकार से देखने वाले विद्वान् राजा के राज्य विभागों में कार्य करें। और उनके 'इर्दृङ्' आदि ही नाम हों ।
इसी प्रकार सात प्रकार से विवेचना करने वाला होने से उनका मुख्य पुरुष और परमेश्वर भी इन सात नामों से कहाता है ।
Subject
ऋत आदि सात प्रकार की विवेचना।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
मरुतो देवताः । आर्षी गायत्री | षड्जः ॥