Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 17 / Mantra 35

98 Mantra
17/35
Devata- इन्द्रो देवता Rishi- अप्रतिरथ ऋषिः Chhand- आर्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सऽइषु॑हस्तैः॒ स नि॑ष॒ङ्गिभि॑र्व॒शी सꣳस्र॑ष्टा॒ स युध॒ऽइन्द्रो॑ ग॒णेन॑। स॒ꣳसृ॒ष्ट॒जित् सो॑म॒पा बा॑हुश॒र्ध्युग्रध॑न्वा॒ प्रति॑हिताभि॒रस्ता॑॥३५॥

सः। इषु॑हस्तै॒रितीषु॑ऽहस्तैः। सः। नि॒ष॒ङ्गिभि॒रिति॑ निष॒ङ्गिऽभिः॑। व॒शी। सस्र॒ष्टेति॒ सम्ऽस्र॑ष्टा। सः। युधः॑। इन्द्रः॑। ग॒णेन॑। स॒ꣳसृ॒ष्ट॒जिदिति॑ सꣳसृष्ट॒ऽजित्। सो॒म॒पा इति॑ सोम॒ऽपाः। बा॒हु॒श॒र्द्धीति॑ बाहुऽशर्द्धी। उ॒ग्रध॒न्वेत्यु॒ग्रऽध॑न्वा। प्रति॑हिताभि॒रिति॒ प्रति॑ऽहिताभिः। अस्ता॑ ॥३५ ॥

Mantra without Swara
सऽइषुहस्तैः स निषङ्गिभिर्वशी सँस्रष्टा स युधऽइन्द्रो गणेन । सँसृष्टजित्सोमपा बाहुशर्ध्युग्रधन्वा प्रतिहिताभिरस्ता ॥

सः। इषुहस्तैरितीषुऽहस्तैः। सः। निषङ्गिभिरिति निषङ्गिऽभिः। वशी। सस्रष्टेति सम्ऽस्रष्टा। सः। युधः। इन्द्रः। गणेन। सꣳसृष्टजिदिति सꣳसृष्टऽजित्। सोमपा इति सोमऽपाः। बाहुशर्द्धीति बाहुऽशर्द्धी। उग्रधन्वेत्युग्रऽधन्वा। प्रतिहिताभिरिति प्रतिऽहिताभिः। अस्ता॥३५॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( सः ) वह ( वशी ) अपने भीतरी काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मात्सर्य इन छः शत्रुओं पर वश कर्त्ता या राष्ट्र का वशयिता अथवा कान्तिनान् प्रजाओं का प्रिय होकर ( इषुहस्तैः) बाण आदि को दूर फेंकने वाले अस्त्रों को हाथ में लिये । निषङ्गिभिः) खड्गधारी वीरों के साथ ( संस्रष्टा ) मिल कर उनके बीच उत्तम कर्ता धर्त्ता एवं व्यवस्थापक होकर ( गणेन ) अपने गण, सैन्यदल सहित ( युधः ) युद्ध करने वाला होता है । ( सः ) वह ही ( सोमपाः ) सोमरस का पान करने वाला अथवा 'सोम' राजा और राष्ट्र का पालन करने हारा, ( बाहुशर्धी ) बाहुबल, क्षात्रवल से युक्त होकर ( संसृष्टजित् ) खूब परस्पर मिलकर आये, सुव्यवस्थित शत्रु सेनादल का विजेता होता है । (सः) और वह ही ( उग्रधन्वा ) भयंकर धनुर्धर होकर ( प्रतिहिताभिः ) प्रति पक्ष पर फेंके गये बाणों से ( अस्ता ) शत्रुओं का नाशक अथवा ( प्रतिहिताभिः ) साक्षात् धारण की, वशीकृत या मुकाबले पर खड़ी की गयी, अपनी सेनाओं से ( अस्ता ) शत्रु दलपर शस्त्रास्त्रों का फेंकने वाला होता है।
Subject
विजयी, वशी राष्ट्रपति का वर्णन ।