Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 17 / Mantra 29

98 Mantra
17/29
Devata- विश्वकर्मा देवता Rishi- भुवनपुत्रो विश्वकर्मा ऋषिः Chhand- आर्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
प॒रो दि॒वा प॒रऽए॒ना पृ॑थि॒व्या प॒रो दे॒वेभि॒रसु॑रै॒र्यदस्ति॑। कꣳस्वि॒द् गर्भं॑ प्रथ॒मं द॑ध्र॒ऽआपो॒ यत्र॑ दे॒वाः स॒मप॑श्यन्त॒ पूर्वे॑॥२९॥

प॒रः। दि॒वा। प॒रः। ए॒ना। पृ॒थि॒व्या। प॒रः। दे॒वेभिः॑। असु॑रैः। यत्। अस्ति॑। कम्। स्वि॒त्। गर्भ॑म्। प्र॒थ॒मम्। द॒ध्रे॒। आपः॑। यत्र॑। दे॒वाः। स॒मप॑श्य॒न्तेति॑ स॒म्ऽअप॑श्यन्त। पूर्वे॑ ॥२९ ॥

Mantra without Swara
परो दिवा परऽएना पृथिव्या परो देवेभिरसुरैर्यदस्ति । कँ स्विद्गर्भम्प्रथमन्दध्रऽआपो यत्र देवाः समपश्यन्त पूर्वे ॥

परः। दिवा। परः। एना। पृथिव्या। परः। देवेभिः। असुरैः। यत्। अस्ति। कम्। स्वित्। गर्भम्। प्रथमम्। दध्रे। आपः। यत्र। देवाः। समपश्यन्तेति सम्ऽअपश्यन्त। पूर्वे॥२९॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
राजा के पक्ष में - [ प्र० ] ( दिवा परः ) सूर्य से भी गुणों में पर अर्थात् उत्कृष्ट ( एना पृथिव्याः परः ) इस पृथिवी से भी गुणों में उत्कृष्ट, ( देवेभिः ) विद्वानों से और ( असुरैः ) अविद्वान्, केवल प्राणधारी बलवान् पुरुषों से भी ( परः ) ऊंचा (यत् अस्ति ) जो पदाधिकारी है वह कौन है ? और ( आपः ) आप्त प्रजाएं ( कं स्वित् ) किस ( प्रथमम् ) सर्वश्रेष्ठ को ( गर्भम् ) राष्ट्र के ग्रहण में समर्थ जानकर अपने बीच में ( दध्रे ) धारण करती हैं । ( यत्र ) जिसके प्रश्रय पर ( पूर्वे ) शक्तियों में पूर्ण ( देवाः ) समस्त विद्वान् और राजा गण ( सम् अपश्यन्त ) राष्ट्र के कार्यों का भली प्रकार आलोचन या विचार करते हैं। वह कौन है ? (उत्तर) राजा ।
ईश्वर के पक्ष में- ( दिवः परः ) आकाश और सूर्य से भी परे, पृथिवी से भी परे, ( देवेभिः ) दिव्य पदार्थों और प्राणों से भी परे, ( असुरैः ) काल रूप वर्ष आदि से भी परे कौन है ? ( आपः ) प्रकृति के सूक्ष्म परमाणु किस शक्ति को प्रथम अपने भीतर धारण करते हैं ? और ( यत्र ) किसमें ( पूर्वे देवाः ) पूर्ण शक्तियुप्त दिव्य पदार्थ भी ( सम् अपश्यन्त ) अपने को एकत्र हुआ पाते हैं। या किसके आश्रय पर ( पूर्वे देवा: ) पूर्ण विद्वान् पुरुष ( सम् अपश्यन्त ) सम्यग् दर्शन करते हैं। ( उत्तर ) ब्रह्म ।
Subject
सर्वोत्कृष्ट पद की मीमांसा ।पक्षान्तर में परमेश्वर का वर्णन ।