Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 17 / Mantra 17

98 Mantra
17/17
Devata- विश्वकर्मा देवता Rishi- भुवनपुत्रो विश्वकर्मा ऋषिः Chhand- निचृदार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यऽइ॒मा विश्वा॒ भुव॑नानि॒ जुह्व॒दृषि॒र्होता॒ न्यसी॑दत् पि॒ता नः॑। सऽआ॒शिषा॒ द्रवि॑णमि॒च्छमा॑नः प्रथम॒च्छदव॑राँ॒२ऽआवि॑वेश॥१७॥

यः। इ॒मा। विश्वा॑। भुव॑नानि। जुह्व॑त्। ऋषिः॑। होता॑। नि। असी॑दत्। पि॒ता। नः॒। सः। आ॒शिषेत्या॒ऽशिषा॑। द्रवि॑णम्। इ॒च्छमा॑नः। प्र॒थ॒म॒च्छदिति॑ प्रथम॒ऽछत्। अव॑रान्। आ। वि॒वे॒श॒ ॥१७ ॥

Mantra without Swara
यऽइमा विश्वा भुवनानि जुह्वदृषिर्हाता न्यसीदत्पिता नः । सऽआशिषा द्रविणमिच्छमानः प्रथमच्छदवराँऽआविवेश ॥

यः। इमा। विश्वा। भुवनानि। जुह्वत्। ऋषिः। होता। नि। असीदत्। पिता। नः। सः। आशिषेत्याऽशिषा। द्रविणम्। इच्छमानः। प्रथमच्छदिति प्रथमऽछत्। अवरान्। आ। विवेश॥१७॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
राजा के पक्ष में - ( य: ) जो ( नः ) हमारा ( पिता ) पिता के समान पालक ( ऋषिः ) ज्ञानवान् होकर ( इमा ) इन ( विश्वा भुवनानि
)
समस्त उत्पन्न मनुष्य पशु पक्षी आदि प्राणियों को ( जुह्वत् ) अपने अधीन स्वीकार करता है और ( होता ) सबका स्वीकर्त्ता, और गृहीता, स्वामी होकर ( नि असीदत् ) निश्चय करके सिहांसन पर विराजता है (सः) वह ( आशिषा ) इच्छापूर्वक ( द्रविणम् ) ऐश्वर्य की ( इच्छमानः ) कामना करता हुआ स्वयं ( प्रथमच्छत् ) प्रथम, सर्वश्रेष्ठ पदपर अधिष्ठित होकर ( अवरान् ) अपने से छोटे, अपने अधीन लोगों को ( आविवेश ) ऐश्वर्य प्रदान करता है ।
परमेश्वर - पक्ष में - ( यः ) जो ( नः पिता ) हमारा पालक परमेश्वर ( इमा विश्वा भुवनानि ) इन समस्त भुवनों लोकों को ( जुह्वत् ) प्रलय कल में आहित करके अथवा अपने वश में लेकर ( ऋषिः ) स्वयं ज्ञानवान् और ( होता ) सबका आदानकर्त्ता, वशयिता रूप से । ( नि असीदत् ) व्यापक रूप में विराजता है । ( सः ) वह अपने ( आशिषा ) व्यापक, शासनसामर्थ्य से ( द्रविणम् ) द्रुतगति से चलने वाले संसार को ( इच्छमानः ) अपनी कामना या संकल्प मात्र से चलाता हुआ स्वयं ( प्रथमच्छत् ) सर्वोत्तम सबसे विशाल लोकों को भी आच्छादित करके ( अवरान् ) अपने से बाद में उत्पन्न आकाशदि भूतों और समस्त लोकों को ( आविवेश ) गति देता और उनमें व्यापक होकर रहता है ।
Subject
मुख्य राजा का अधीनों के प्रति कर्त्तव्य । पक्षान्तर में परमेश्वर का वर्णन ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
मुख्य राजा का अधीनों के प्रति कर्त्तव्य । पक्षान्तर में परमेश्वर का वर्णन । त्रिष्टुभः । धैवतः ॥