Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 51

66 Mantra
16/51
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्वा देवा ऋषयः Chhand- निचृदार्षी यवमध्या त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
मीढु॑ष्टम॒ शिव॑तम शि॒वो नः॑ सु॒मना॑ भव। प॒र॒मे वृ॒क्षऽआयु॑धं नि॒धाय॒ कृत्तिं॒ वसा॑न॒ऽआ च॑र॒ पिना॑क॒म्बिभ्र॒दा ग॑हि॥५१॥

मीढु॑ष्टम। मीढु॑स्त॒मेति॒ मीढुः॑ऽतम। शिव॑त॒मेति॒ शिव॑ऽतम। शि॒वः। नः॒। सु॒मना॒ इति॑ सु॒ऽमनाः॑। भ॒व॒। प॒र॒मे। वृ॒क्षे। आयु॑धम्। नि॒धायेति॑ नि॒ऽधाय॑। कृत्ति॑म्। वसा॑नः। आ। च॒र॒। पिना॑कम्। बिभ्र॑त्। आ। ग॒हि॒ ॥५१ ॥

Mantra without Swara
मीढुष्टम शिवतम शिवो नः सुमना भव । परमे वृक्ष आयुधन्निधाय कृत्तिँवसानऽआचर पिनाकम्बिभ्रदा गहि ॥

मीढुष्टम। मीढुस्तमेति मीढुःऽतम। शिवतमेति शिवऽतम। शिवः। नः। सुमना इति सुऽमनाः। भव। परमे। वृक्षे। आयुधम्। निधायेति निऽधाय। कृत्तिम्। वसानः। आ। चर। पिनाकम्। बिभ्रत्। आ। गहि॥५१॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
हे ( मीढुस्तम ) अतिशय वीर्यसम्पन्न एवं प्रजा पर अति अधिक सुखों के और शत्रुओं पर अति अधिक शरों के वर्षों करने में समर्थ ! हे ( शिवतम ) अतिशय कल्याणकारिन् ! तू (नः) हमारे प्रति ( शिवः ) कल्याणकारी और ( सुमनाः ) शुभ चित्त वाला ( भव ) ( हो । तू ( परमे वृत्ते ) अति अधिक काटने योग्य शत्रु सेना पर अपने( आयुधं निधाय ) शस्त्र को रख कर और ( कृत्तिम् ) धर्म को ( वसानः) धारण करके ( पिनाकं बिभ्रद्) प्रजा के पालन और त्राण साधन शस्त्र , धनुष आदि (बिभ्रद् ) धारण करता हुआ ( आचर ) चारों ओर विचर और ( आ गहि ) हमें प्राप्त हो ।
Subject
नाना रुद्रों अधिकारियों का वर्णन ।
Footenote
'मीऴ्दुस्तम' इति काण्व० ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
निचृदार्षी यवमध्या त्रिष्टुप् । धैवतः ॥