Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 45

66 Mantra
16/45
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्वा देवा ऋषयः Chhand- निचृदार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नमः॒ शुष्क्या॑य च हरि॒त्याय च॒ नमः॑ पास॒व्याय च रज॒स्याय च॒ नमो॒ लोप्या॑य चोल॒प्याय च॒ नम॒ऽऊर्व्या॑य च॒ सूर्व्या॑य च॥४५॥

नमः॑। शुष्क्या॑य। च॒। ह॒रि॒त्या᳖य। च॒। नमः॑। पा॒ꣳस॒व्या᳖य। च॒। र॒ज॒स्या᳖य। च॒। नमः॑। लोप्या॑य। च॒। उ॒ल॒प्या᳖य। च॒। नमः॑। ऊर्व्या॑य। च॒। सूर्व्या॒येति॑ सु॒ऽऊर्व्या॑य। च॒ ॥४५ ॥

Mantra without Swara
नमः शुष्क्याय च हरित्याय च नमः पाँसव्याय च रजस्याय च नमो लोप्याय चोलप्याय च नम ऊर्व्याय च सूर्व्याय च नमः पर्णाय ॥

नमः। शुष्क्याय। च। हरित्याय। च। नमः। पाꣳसव्याय। च। रजस्याय। च। नमः। लोप्याय। च। उलप्याय। च। नमः। ऊर्व्याय। च। सूर्व्यायेति सुऽऊर्व्याय। च॥४५॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( शुष्क्याय च ) शुष्क पदार्थों से व्यवहार करने वाले, (हरित्याय च ) शाक आदि हरे पदार्थों के अधिकारी, ( पांसव्याय च ) पांसु, मिट्टी ढोने वालों पर का अधिकारी ( रजस्याय ) रजस् अर्थात् सूक्ष्म धूल का व्यापार करने वाले, ( लोप्याय च ) पदार्थों का लोप या विनाश करने वाले, ( उलप्याय च ) उलप, तृण राशि के ऊपर के अधिकारी, ( ऊर्व्याय च ) 'ऊर्वी' भूमि या विस्तृत खेतों पर के शासक अथवा ( सूर्व्याय च ) उत्तम भूमियों के स्वामी, अथवा उत्कृष्ट हिंसा कार्य में कुशल, इन सब को भी उत्तम वेतन आदि दे ।
Subject
नाना रुद्रों अधिकारियों का वर्णन ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
निचृदार्षी त्रिष्टुप् । धैवतः ॥