Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 44

66 Mantra
16/44
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्वा देवा ऋषयः Chhand- आर्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नमो॒ व्रज्या॑य च॒ गोष्ठ्या॑य च॒ नम॒स्तल्प्या॑य च॒ गेह्या॑य च॒ नमो॑ हृद॒य्याय च निवे॒ष्याय च॒ नमः॒ काट्या॑य च गह्वरे॒ष्ठाय॑ च॒॥४४॥

नमः॑। व्रज्या॑य। च॒। गोष्ठ्या॑य। गोस्थ्या॒येति॒ गोऽस्थ्या॑य। च॒। नमः॑। तल्प्या॑य। च॒। गेह्या॑य। च॒। नमः॑। हृ॒द॒य्या᳖य। च॒। नि॒वे॒ष्या᳖येति॑ निऽवे॒ष्या᳖य। च॒। नमः॑। काट्या॑य। च॒। ग॒ह्व॒रे॒ष्ठाय॑। च॒ ॥४४ ॥

Mantra without Swara
नमो व्रज्याय च गोष्ठ्याय च नमस्तल्प्याय च गेह्याय च नमो हृदय्याय च निवेष्याय च नमः काट्याय च गह्वरेष्ठाय च नमः शुष्क्याय ॥

नमः। व्रज्याय। च। गोष्ठ्याय। गोस्थ्यायेति गोऽस्थ्याय। च। नमः। तल्प्याय। च। गेह्याय। च। नमः। हृदय्याय। च। निवेष्यायेति निऽवेष्याय। च। नमः। काट्याय। च। गह्वरेष्ठाय। च॥४४॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( व्रज्याय ) व्रज अर्थात् गौओं के रेवड़ों के अध्यक्ष ( गोष्ठयाय) सरकारी गोशालाओं के अध्यक्ष, (तत्प्याय) विस्तरयोग्य पदार्थों पर नियुक्त सेवक, ( गेह्याय ) गृह, मकान पर नृत्य अधिकारी, (हृदय्याय च ) हृदय को सदा प्रसन्न करनेवाले खिलौने और खेल करने वाले, हृदय के प्रेमी (निवेष्याय च) उत्तम वेष पहनाने और बनाने वाला अथवा ( निवध्याय च ) आवर्त या निहार या कोहरा को दूर करने वाला (काव्याय च ) कट, चटाई आदि बनाने में प्रवीण' या उचित रूप से बिछाने वाला, (गह्वरेष्ठाय च ) पर्वतों के गहरी, गहरे जल और विषम स्थानों का उत्तम परिचित इन सबको (नमः) उचित आदर और अन्नादि वृत्ति प्राप्त हो ।
Subject
नाना रुद्रों अधिकारियों का वर्णन ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
आर्षी त्रिष्टुप । धैवतः ॥