Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 43

66 Mantra
16/43
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्वा देवा ऋषयः Chhand- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
नमः॑ सिक॒त्याय च प्रवा॒ह्याय च॒ नमः॑ किꣳशि॒लाय॑ च क्षय॒णाय॑ च॒ नमः॑ कप॒र्दिने॑ च पुल॒स्तये॑ च॒ नम॑ऽइरि॒ण्याय च प्र॒पथ्याय च॥४३॥

नमः॑। सि॒क॒त्या᳖य। च॒। प्र॒वा॒ह्या᳖येति॑ प्रऽवा॒ह्या᳖य। च॒। नमः॑। कि॒ꣳशि॒लाय॑। च॒। क्ष॒य॒णाय॑। च॒। नमः॑। क॒प॒र्दिने॑। च॒। पु॒ल॒स्तये॑। च॒। नमः॑। इ॒रि॒ण्या᳖य। च॒। प्र॒प॒थ्या᳖येति॑ प्रऽप॒थ्या᳖य। च॒ ॥४३ ॥

Mantra without Swara
नमः सिकत्याय च प्रवाह्याय च नमः किँशिलाय च क्षयणाय च नमः कपर्दिने च पुलस्तये च नम इरिण्याय च प्रपथ्याय च नमः सिकत्याय ॥

नमः। सिकत्याय। च। प्रवाह्यायेति प्रऽवाह्याय। च। नमः। किꣳशिलाय। च। क्षयणाय। च। नमः। कपर्दिने। च। पुलस्तये। च। नमः। इरिण्याय। च। प्रपथ्यायेति प्रऽपथ्याय। च॥४३॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( सिकत्याय च ) बालू के विज्ञान जाननेवाले ( प्रवाह्याय च) 'प्रवाह', जलधारा के प्रयोगज्ञ अथवा भारी पदार्थ को अच्छी प्रकार दूर ले जाने के साधनों के जानकार ( किंशिलाय च ) छोटी बजरी के प्रयोगज्ञ या क्षुद्र २ पेशों के अध्यक्ष, ( क्षयणाय च ) जलों से भरे गढों के अध्यक्ष अथवा गृह बना कर रहने वाले, ( कपर्दिने च ) कपर्द अर्थात- कौड़ी, सीप, शंख आदि के व्यापार के अध्यक्ष या जटाजूट वाले जन ( पुलस्तये च ) बढ़े २ भारी पदार्थों को उठाने वाले यन्त्रों का निर्माता, ( इरिण्याय च ) ऊपर भूमियों का अधिकारी और (प्रपथ्याय च ) उत्तम २ मार्गो का अधिकारी इन सब को ( नमः ४) उचित मान, पद, वेतन यादि प्राप्त हो ।
Subject
नाना रुद्रों अधिकारियों का वर्णन ।
Footenote
'पुलस्तिने च' इति काण्व० ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
जगती । निषाद ॥