Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 2

66 Mantra
16/2
Devata- रुद्रो देवता Rishi- परमेष्ठी वा कुत्स ऋषिः Chhand- स्वराडर्ष्यनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
या ते॑ रुद्र शि॒वा त॒नूरघो॒राऽपा॑पकाशिनी। तया॑ नस्त॒न्वा शन्त॑मया॒ गिरि॑शन्ता॒भि चा॑कशीहि॥२॥

या। ते॒। रु॒द्र॒। शि॒वा। त॒नूः। अघो॑रा। अपा॑पकाशि॒नीत्यपा॑पऽकाशिनी। तया॑। नः॒। त॒न्वा᳕। शन्त॑म॒येति॒ शम्ऽत॑मया। गिरि॑श॒न्तेति॒ गिरि॑ऽशन्त। अ॒भि। चा॒क॒शी॒हि॒ ॥२ ॥

Mantra without Swara
या ते रुद्र शिवा तनूरघोरापापकाशिनी । तया नस्तन्वा शन्तमया गिरिशन्ताभि चाकशीहि ॥

या। ते। रुद्र। शिवा। तनूः। अघोरा। अपापकाशिनीत्यपापऽकाशिनी। तया। नः। तन्वा। शन्तमयेति शम्ऽतमया। गिरिशन्तेति गिरिऽशन्त। अभि। चाकशीहि॥२॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
हे (रुद्र) शत्रुओं के रुलाने और सज्जनों को सुख देने हारे ! राजन् ! (या) जो (ते) तेरी ( शिवा ) कल्याणकारिणी ( अघोरा ) अघोर, उपदवरहित, शान्त, सौम्य रूप वाली ( अपापकाशिनी ) पाप से अतिरिक्त पुण्य का ही प्रकाश करने वाली ( तनूः ) विस्तृत कानूनादि की व्यवस्था या आज्ञा रूप वाणी है ( तया ) उस ( तन्वा ) ( शन्तमया ) अति अधिक कल्याण और शान्तिदायिनी वाणी, राज्यव्यवस्था से, हे ( गिरिशन्त ) आज्ञारूप, व्यावस्था या वाणी से ही सब को शान्ति देने वाले ! तू ( अभि चाकशीहि ) सब को देख सब पर दृष्टि रख या तू राज्य का शासन कर ।
Subject
रुद्र की शिव तनु, शान्तिकारिणी राजव्यवस्था ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
स्वराड् अनुष्टुप् । गांधारः ॥