Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 15 / Mantra 26

65 Mantra
15/26
Devata- अग्निर्देवता Rishi- परमेष्ठी ऋषिः Chhand- भुरिगार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒यमि॒ह प्र॑थ॒मो धा॑यि धा॒तृभि॒र्होता॒ यजि॑ष्ठोऽअध्व॒रेष्वीड्यः॑। यमप्न॑वानो॒ भृग॑वो विरुरु॒चुर्वने॑षु चि॒त्रं वि॒भ्वं वि॒शेवि॑शे॥२६॥

अ॒यम्। इ॒ह। प्र॒थ॒मः। धा॒यि॒। धा॒तृभि॒रिति॑ धा॒तृऽभिः॑। होता॑। यजि॑ष्ठः। अ॒ध्व॒रेषु॑। ईड्यः॑। यम्। अप्न॑वानः। भृग॑वः। वि॒रु॒रु॒चुरिति॑ विऽरु॒रु॒चुः। वने॑षु। चि॒त्रम्। वि॒भ्व᳖मिति॑ वि॒ऽभ्व᳖म्। वि॒शेवि॑श॒ इति॑ वि॒शेऽवि॑शे ॥२६ ॥

Mantra without Swara
अयमिह प्रथमो धायि धातृभिर्हाता यजिष्ठो अध्वरेष्वीड्यः । यमप्नवानो भृगवो विरुरुचुर्वनेषु चित्रं विभ्वँविशेविशे ॥

अयम्। इह। प्रथमः। धायि। धातृभिरिति धातृऽभिः। होता। यजिष्ठः। अध्वरेषु। ईड्यः। यम्। अप्नवानः। भृगवः। विरुरुचुरिति विऽरुरुचुः। वनेषु। चित्रम्। विभ्वमिति विऽभ्वम्। विशेविश इति विशेऽविशे॥२६॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
( अयम् ) यह ( प्रथम ) सर्व श्रेष्ठ पुरुष (अध्वरेषु यजिष्टः होता ) यज्ञों में, यज्ञ करने वालों में सबसे उत्तम यश करने वाले होता के समान (अध्वरेषु) अहिंसा रहित राष्ट्र के पालन के कार्यों में या युद्धों में ( यजिष्ठ: ) सबसे उत्तम संगति या व्यवस्था करने हारा, (होता) दान- शील होकर ( ईष्य: ) स्तुति करने योग्य है। वही ( धातृभिः ) राष्ट्र के धारण करने वाले पुरुषों द्वारा ( इह ) इस राष्ट्र शासन के मुख्य पद पर ( धायि ) स्थापित किया जाता है । ( अप्नवानः भुगवः ) ज्ञानी विद्वान् जिस प्रकार ( वनेषु ) वनों में ( विभ्वं ) व्यापक अग्नि को ( विरुरुदुः ) विविध उपायों से उसी प्रकार ( वनेषु) रश्मियों में ( चित्रम् ) अद्भुत तेजस्वी, (दिभ्वम् ) विविध सामर्थ्यों से सम्पन्न ( यम् ) जिस प्रधान पुरुष को आश्रय लेकर प्रकाशित करते हैं, प्रज्वलित करते हैं ( विशे विशे) प्रजा के हित के लिये ( अप्नवानः भृगवः ) रूप विज्ञान थाली तेजस्वी पुरुष ( विरुरुचुः ) विविध प्रकार से प्रकाशित करते हैं। उसके लिये अपने २ गुण और शिल्प प्रकट करते हैं ।
Subject
दावानल के समान उग्र राजा ।