Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

Yajurveda Adhyay 13 / Mantra 15

57 Mantra
13/15
Devata- अग्निर्देवता Rishi- त्रिशिरा ऋषिः Chhand- निचृदार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
भुवो॑ य॒ज्ञस्य॒ रज॑सश्च ने॒ता यत्रा॑ नि॒युद्भिः॒ सच॑से शि॒वाभिः॑। दि॒वि मू॒र्द्धानं॑ दधिषे स्व॒र्षां जि॒ह्वाम॑ग्ने चकृषे हव्य॒वाह॑म्॥१५॥

भुवः॑। य॒ज्ञस्य॑। रज॑सः। च॒। ने॒ता। यत्र॑। नि॒युद्भि॒रिति॑ नि॒युत्ऽभिः॑। सच॑से। शि॒वाभिः॑। दि॒वि। मू॒र्द्धान॑म्। द॒धि॒षे॒। स्व॒र्षाम्। स्वः॒सामिति॑ स्वः॒ऽसाम्। जि॒ह्वाम्। अ॒ग्ने॒। च॒कृ॒षे॒। ह॒व्य॒वाह॒मिति॑ हव्य॒ऽवाह॑म् ॥१५ ॥

Mantra without Swara
भुवो यज्ञस्य रजसश्च नेता यत्रा नियुद्भिः सचसे शिवाभिः । दिवि मूर्धानन्दधिषे स्वर्षाञ्जिह्वामग्ने चक्रिषे हव्यवाहम् ॥

भुवः। यज्ञस्य। रजसः। च। नेता। यत्र। नियुद्भिरिति नियुत्ऽभिः। सचसे। शिवाभिः। दिवि। मूर्द्धानम्। दधिषे। स्वर्षाम्। स्वःसामिति स्वःऽसाम्। जिह्वाम्। अग्ने। चकृषे। हव्यवाहमिति हव्यऽवाहम्॥१५॥

Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma)

हिन्दी
Yajurveda Sanhita Bhasha Bhashya (Pt. Jaydev Sharma) - हिन्दी
Meaning
हे ( अग्ने ) राजन् ! तेजस्विन् ! सूर्य और अग्नि जिस प्रकार ( भुवः यज्ञस्य रजसः च नेता ) पृथिवी, वायु और लोकों का नायक है और वह ( नियुद्धि: शिवाभिः ) मङ्गलकारिणी वायु की शक्तियों से युक्त होता है और (दिधि मूर्धानम् मेदधिषे ) द्यौलोक में शिरो भाग के समान सर्वोच्च स्थिति को धारण करता है और अग्नि जिस प्रकार (हव्यवाहं जिह्वां चकृषे) हवि को खाने वाली ज्वाला को भी प्रकट करता है उसी प्रकार (यत्र) जिस राष्ट्र में तू ( भुवः ) समस्त पृथिवी का ( नेता ) नायक और ( यज्ञस्य नेता ) समस्त राष्ट्र - व्यवस्था का नायक और ( रजसः च नेता ) समस्त लोकसमूह, जन समूह और समस्त ऐश्वर्यों का नेता, प्राप्त करनेवाला होकर ( शिवाभिः ) मङ्गलकारिणी ( नियुद्भिः ) वायु के समान तीव्र वेगवाली शत्रु को छेदन भेदन करनेवाली सेनाओं से भी ( सचसे ) युक्त होकर रहता है और दिवि )न्यायप्रकाशयुक्त श्रेष्ठ व्यवहार में ( मूर्धानं ) शिरोभाग, सर्वोच्च पद को ( दधिषे ) धारण करता है और ( हव्यवाहम् ) प्रहण करने योग्य ज्ञान से पूर्ण आज्ञा वचनों को प्राप्त करानेवाली (स्पर्णाम्) सुखदायिनी ( जिह्वाम् ) वाणी, आज्ञा को भी ( चकृपे )प्रकट करता है ॥शत० ७ । ४ । १।१५ ॥
Subject
सूर्य के समान सेनापति का कर्तव्य ।
Rishi | Devata | Chhanda | Swara
त्रिशिरा ऋषिः । अग्निर्देवता । निचृदार्षी त्रिष्टुप् । धैवतः ॥